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यादें Champions Trophy 2013 के पहले मैच की

 इंग्लैंड, कहने को तो दुनिया के नख्शे पर बस एक अन्य देश है। लेकिन, भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिये इंग्लैंड भावनाओं का समुंदर है। इंग्लैंड ही वो जगह थी जहाँ कपिल देव ने पहली बार वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई थी। इंग्लैंड ही वो जगह थी जहाँ गांगुली ने टी-शर्ट उतारी थी। इंग्लैंड ही वो जगह थी जहाँ सेमीफाइनल में मिली हार ने पूरे देश की आँखें नम कर दी थीं। फ़िलहाल, एक बार फिर भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनलिस्ट के रूप में इंग्लैंड में मौजूद है और भारत के पास Champions Trophy 2013 के बाद पहली आई. सी. सी. ट्रॉफी जीतने का सुनहरा मौका है।

ये कहना ग़लत नहीं होगा कि इंग्लैंड से क्रिकेट प्रेमियों की बहुत सी खट्टी-मीठी यादें जुड़ी हैं। साल 2013 में भी भारत ने सबकी उम्मीदों के उलट प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी अपने नाम की थी।

अगर, 2011 विश्व कप जीत ने करोड़ों आंखों के ख़्वाब पूरे किये थे। तो, 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीत भी उससे कम नहीं थी। जी दोस्तों! आप सही समझे।  2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीत के 8 साल पूरे होने की ख़ुशी में नारद टी. वी. आपके लिये लाया है एक खास पेशकश।

जहाँ हम आज से 8 साल पहले हुई चैंपियंस ट्रॉफी के हर मैच में घटे बहतरीन प्रदर्शनों और अनोखी घटनाओं की यादें ताज़ा करेंगे।

India vs South Africa

Champions Trophy 2013 में दोनों टीमों के खिलाड़ियों की लिस्ट

दोस्तों, क्रिकेट की शक्ल 2008 में आईपीएल शुरू होने के बाद से ही बदलना शुरू हो गयी थी। लेकिन, 2011 के बाद क्रिकेट ने अपना रंग भी बदलना शुरू किया था। अब हर देश धीरे-धीरे अपनी अलग लीग को क़ामयाब करने पर ध्यान दे रहा था। जिसके कारण आई. सी. सी. टूर्नामेंटों को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था।

इसलिये, सभी की सहमति से ये निर्णय लिया गया कि, 2013 के जून महीने में इंग्लैंड की ज़मीन पर होने वाला चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट इस तरह का आख़िरी टूर्नामेंट होगा। उस दौर की सभी टॉप-8 टीमें चैंपियंस ट्रॉफी जीत का ख़्वाब लिये इंग्लैंड पहुँची। लेकिन, भारतीय टीम के लिये चुनौती इससे कहीं बड़ी थी।

इस टूर्नामेंट से क़रीब 1 महीने पहले ही आईपीएल में फिक्सिंग के चलते श्रीसंथ जैसे बड़े खिलाड़ी को जेल जाना पड़ा था। सी. एस. के. समेत बहुत से अन्य बड़े खिलाड़ी भी शक के घेरे में थे। उसके ऊपर से सहवाग और गंभीर के बाद भारतीय टीम अच्छी ओपनिंग जोड़ी को तरस रही थी। हालांकि, इन सब परेशानियों के बावजूद अच्छी खबर ये थी

किस टीम ने जीता टॉस

कि कोहली, रोहित, धवन, कार्तिक और धोनी सभी खिलाड़ी फ़ॉर्म में थे। जिसका नतीजा ये रहा कि भारत ने अपने दोनों प्रैक्टिस मैच जीत लिये। जिसमें दिनेश कार्तिक के बल्ले से निकले दो शतक बहुत ख़ास थे। लेकिन, सवाल अब भी ये था कि क्या ओपनिंग में धवन के साथ दिनेश कार्तिक आयेंगे ? या अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अभी तक जूझ रहे रोहित शर्मा अब ओपनिंग करेंगे ?

Rohit and Dhawan in Champions Trophy 2013

बहुत से अनसुलझे सवाल और जीत की उम्मीद लिए भारत ने 6 जून 2013 को अपने अभियान की शुरुआत की। आज से ठीक 8 साल पहले खेले गए उस मुक़ाबले में कार्डिफ़ के सोफ़िया गार्डन्स में भारत के सामने सबकी फेवरेट साउथ अफ़्रीका टीम थी। उस समय साउथ अफ्रीका टीम अपने पूरे रंग में थी।

बल्लेबाज़ी में हाशिम अमला, डी विलियर्स, डू प्लेसिस , ड्यूमिनी और डेविड मिलर जैसे नाम थे। तो, गेंदबाज़ी में मोर्केल, मैक्लेरन और सोसोबे कि तिकड़ी थी। ऊपर से ओवरकास्ट कंडीशन में अफ़्रीका ने टॉस जीतकर भारत को बल्लेबाज़ी के लिये बुलाया। धोनी ने रोहित शर्मा की शार्ट पिच गेंदबाज़ी को अच्छे से खेलने की प्रतिभा पर भरोसा जताते हुये, रोहित को धवन के साथ ओपनिंग के लिये उतारा।

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जब रोहित धवन के साथ ओपनिंग पर आये तो सबने कहा कि “रोहित के लिये टीम में बने रहने का ये आख़िरी मौका है”। लेकिन, रोहित ने उस रोज़ तमाम दबाव और सवालों को भूलकर शानदार बल्लेबाज़ी की। रोहित ने पॉवरप्ले का फ़ायदा उठाते हुये साउथ अफ़्रीकी गेंदबाज़ों को हावी नहीं होने दिया।

जब भी कोई अफ़्रीकी गेंदबाज़ रोहित को बाउंसर से डराना चाहता, तो रोहित पुल या हुक शॉट मार कर गेंद को बाउंड्री के पार भेज देते। जहाँ एक ओर से रोहित चढ़कर बल्लेबाज़ी कर रहे थे। तो, वहीँ दूसरी ओर से धवन दबे क़दमों से रन बनाये जा-रहे थे। देखते ही देखते दोनों ने शतकीय साझेदारी पूरी की। जोकि, 2009 के बाद विदेशी धरती पर भारत के लिए सलामी जोड़ी की पहली शातकीय साझेदारी थी।

क्यों हार के करीब पहुँच गयी थी भारतीय टीम

ये साझेदारी 22वें ओवर में 127 के स्कोर पर रोहित शर्मा का विकेट गिरने से टूटी। लेकिन, रोहित के बाद बल्लेबाज़ी करने आये कोहली ने रन बनाना जारी रखा। उधर धवन ने तेज़ी से रन बनाते हुये अपना पहला एकदिवसीय शतक भी पूरा कर लिया। भारत अब धीरे-धीरे बड़े स्कोर की ओर बढ़ रहा था। तभी 210 के स्कोर पर कोहली 31 रन बनाकर आउट हो गये।

उसके बाद धवन , कार्तिक और रैना के विकेट भी अंतराल पर गिरते गये। भारतीय पारी लड़खड़ा रही थी। कि, जडेजा ने पहले धोनी और बाद में अश्विन के साथ मिलकर स्कोर 331 तक पहुँचाया। धवन के 114 रनों के अलावा रोहित के 65 और जडेजा के तेज़ 47 रनों का इस बड़े स्कोर में ख़ास योगदान था।

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साउथ अफ़्रीका को मैच जीतने के लिये 332 रन बनाने थे और भारत को जीत से शुरुआत करने के लिये 331 रन बचाने थे।

India vs South Africa Champions Trophy 2013

       दोस्तों, आमतौर पर पहली पारी में सवा तीन सौ से अधिक रन बन जाने के बाद मैच एकतरफ़ा होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। लेकिन, अमला और इंग्रम की साउथ अफ़्रीकी सलामी जोड़ी अटैक करने के मूड में ही उतरी थी। मगर, पहले भुवनेश्वर कुमार ने इंग्रम को और फिर उमेश यादव ने अमला को आउट कर अफ़्रीकी टीम के लिये परेशानी और बढ़ा दी।

अब क्रीज़ पर ‘मिस्टर 360’ यानी डी विलियर्स के साथ पिंच हिटर रोबिन पीटरसन थे। 31 रन पर दो विकेट खोने के बाद भी इन दोनों बल्लेबाज़ों ने आक्रमण नहीं रोका। ख़ासकर पीटरसन बिना जोखिम उठाये तेज़ी से रन बना रहे थे। 24वें ओवर के बाद अफ़्रीका का स्कोर क़रीब डेढ़ सौ रन था। भारतीय गेंदबाज़ी भी कुछ कारगर नहीं लग रही थी। कि, तभी ‘सर’ जडेजा ने अपना कमाल दिखाया।

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इस बार जडेजा ने शानदार फ़ील्डिंग के दम पर पीटरसन को रन किया और आउट भारत को बड़ी सफलता दिलाई। तीसरे विकेट के लिये जुड़े तेज़ 121 रन अफ़्रीका को मैच में वापस ले आये थे। लेकिन, 182 के स्कोर पर 6 रन के अंदर ही अफ़्रीका के 3 विकेट गिर गये। जिनमें डी विलियर्स और मिलर के बड़े विकेट भी शामिल थे।

यहाँ से प्लेसिस ने कुछ देर मैक्लेरन के साथ मिलकर साउथ अफ्रीका की उम्मीदें बनायी रखीं। लेकिन, जैसे ही डुप्लेसिस 238 के स्कोर पर आउट हुए। वैसे ही भारत की जीत पर मोहर लग गयी। हालांकि, मैक्लेरन ने एक तरफ़ से रन बनाना जारी रखे। लेकिन, उन्हें दूसरे छोर से बिल्कुल भी मदद नहीं मिली और भारत ने मैच 26 रनों से जीत लिया।

साउथ अफ्रीका की तरफ़ से पीटरसन ने 68, डी विलियर्स ने 70 और मैक्लेरन ने 71 रन ज़रूर बनाये। लेकिन, अश्विन, जडेजा , इशांत , यादव और भुवनेश्वर ने एकजुट होकर अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों को घुटने टेकने पर मजबूर किया। इस तरह भारत ने जीत के साथ 2013 चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत की।

Champions Trophy 2013
India vs South Africa

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