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अजीत अगरकर :वो गेंदबाज़ जिसे लोग सचिन तेंदुलकर मानने लगे थे

क्रिकेट का खेल ऐसा होता है, कि अगर किसी युवा प्रतिभावान खिलाड़ी की तुलना किसी लीजेंड से होने लगती है, तो उस युवा खिलाड़ी के लिए आगे बढने के रास्ते और भी कठिन हो जाते हैं, क्योंकि उसे न सिर्फ अपना करियर सवारना होता है, बल्कि उसे चाहने वाले उसके भीतर जिस लीजेंड की झलक देख रहे होते हैं, उस लीजेंड से बेहतर बनने की चाह भी हिलोरे मारने लगती है,

इस कशमकश में कुछ तो निखर जाते हैं, तो कुछ बिखर जाते हैं, आज हम एक ऐसे ही जबरदस्त प्रतिभाशाली ऑलराउंडर की बात करने वाले हैं, जिसे भारत का दूसरा कपिल देव माना जा रहा था, और बहुत से मौकों पर उसने अपने आप को साबित भी किया, लेकिन वो दूसरा कपिल देव नही बन सका, हालाँकि उसने ऐसा मुकाम हासिल किया जो बड़े बड़े खिलाड़ियों को नसीब नही होता है,

हम बात कर रहे हैं अजित अगरकर की, आज हम अजित अगरकर के जीवन और क्रिकेट करियर के कुछ अनसुने और अनजाने किस्सों को जानने की कोशिश करेंग।

Ajit Agarkar

भारत के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजीत अगरकर का जन्म 4 दिसंबर 1977 को मुंबई में हुआ था, अजीत को बचपन से ही क्रिकेट का जबरदस्त शौक था, अगरकर ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत एक बैट्समैन के तौर पर की थी, और ये वो दौर था जब मुंबई में कोई भी युवा खिलाड़ी अगर बल्लेबाज बनना चाहता था

तो वो अपना गुरु सिर्फ मशहूर क्रिकेट गुरु रमाकांत आचरेकर को ही बनाना चाहता था, हम आपको बता दें कि ये वही आचरेकर जी हैं, जिन्होंने सचिन सा कोहिनूर तराशा जो आज क्रिकेट के भगवान कहे जाते हैं, अजीत के परिवार वाले भी अजीत के अंदर एक जबरदस्त बल्लेबाज बनने की क्षमता देखकर उन्हें रमाकांत आचरेकर के पास शिवाजी पार्क ले गये जहाँ अजीत ने क्रिकेट के द्रोणाचार्य कहे जाने वाले आचरेकर जी की देखरेख में बल्लेबाज बनने की प्रैक्टिस शुरू कर दी।

शिवाजी पार्क में आने के बाद वह एक जबरदस्त बल्लेबाज के रूप में नजर आने लगे, साथ ही उन्होंने तेज गेंदबाजी में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया, अब उनकी पहचान एक ऐसे बल्लेबाज की होने लगी थी जो मौका पड़ने पर थोड़ी-बहुत गेंदबाजी कर लेता था और कुछ विकेट भी चटका सकता था, उस दौर में मुंबई में एक से बढकर एक बल्लेबाज निकल रहे थे,

अगरकर भी ऐसे ही बल्लेबाज थे जो बल्ले से सच में आग उगल रहे थे, अंडर-16 लेवल के मशहूर जाइल्स शील्ड क्रिकेट टूर्नामेंट में उन्होंने खूब रन बनाये.

सिर्फ 15 साल की उम्र में साल 1992 में उन्होंने मुंबई की रणजी टीम में जगह बना ली थी, ये वो दौर था जब मुंबई टीम का जलवा हुआ करता था और इस टीम में भी जगह बनानी आसान काम नही था, लेकिन अजीत ने न सिर्फ टीम में जगह बनाई बल्कि तिहरा शतक जड़कर सबको अपना कायल बना दिया था .

यहाँ तक कि कुछ लोग उन्हें सचिन जैसा मानने लगे थे, इसके बाद अगरकर ने अपनी गेंदबाजी में भी धार लाना शुरू कर दिया और ये सिलसिला अगले 4-5 सालों तक चलता रहा.अब लोगों को उनके अंदर भारत के दूसरे कपिल देव की झलक दिखने लगी थी, इसी दौरान उन्होंने एक बल्लेबाज के रूप में भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के लिए खेलते हुए श्रीलंका अंडर-19 के खिलाफ भी जड़ा.

Ajit Agarkar

फिर आया साल 1998 जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय वनडे टीम में मौका मिला, सबसे ख़ास बात तो यह रही कि अपने डेब्यू मैच से लेकर अगले 13 वनडे मुकाबलों तक हर मैच में उन्होंने विकेट लिए, अपने इसी शानदार प्रदर्शन के चलते उन्होंने अनेक रिकॉर्ड कायम किये, इसी दौरान अजित अगरकर ने एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे तेज 50 विकेट लेने का विश्वरिकॉर्ड बनाया, उन्होंने ये कारनामा 23 मैचों में किया था, भारत की ओर से आज भी ये रिकॉर्ड है.

अगरकर के नाम वनडे क्रिकेट में भारत की तरफ से सबसे तेज अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है, उन्होंने यह कारनामा साल 2000 में जिम्‍बाब्‍वे के खिलाफ 21 गेंदों पर किया था, इस पारी के दौरान उन्होंने चार छक्‍के और सात चौके की मदद से नाबाद 67 रन बनाए थे, भारत की ओर से यह रिकॉर्ड आज भी अजित अगरकर के नाम ही दर्ज है, अगरकर के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्ज हैं, जिसके लिए बड़े-बड़े खिलाड़ी तरसते हैं.

अगरकर ने इंग्लैंड के विरुद्ध क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर लाजवाब शतकीय पारी खेली थी, यह पारी अगरकर ने नंबर 8 पर बल्लेबाजी करते हुए खेली थी, अगरकर ने इस पारी में नाबाद 109 बनाये थे, आपकों बता दे, कि लॉर्ड्स के इस मैदान पर महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और रिकी पोटिंग जैसे बल्लेबाज भी शतक नहीं बना पायें हैं.

साल 2003 में अगरकर ने अपनी बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर टीम इंडिया को पूरे 22 साल बाद ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, इस मैच में अगरकर ने पहली पारी में दो और दूसरी पारी में छह विकेट चटकाए थे, हम आपको बता दें कि इससे पहले भारतीय टीम ने 1981 में मेलबर्न के मैदान पर सुनील गावस्कर की कप्तानी में भारत को जीत मिली थी,

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वनडे मैचों में एक पारी में सबसे ज्यादा बार 4 विकेट लेने के मामले में भारतीय गेंदबाजों में अजीत अगरकर अब भी सबसे आगे हैं, उन्होंने 191 वनडे में 12 बार 4 विकेट लिए हैं.

आमतौर पर काफी शांत दिखने वाले अजीत अगरकर पाकिस्तान में अपने गुस्से को लेकर भी बहुत चर्चा में रहे, उनका यह गुस्से वाला किस्सा भी काफी दिलचस्प है, दरअसल ये बात है साल 2006 की, जब भारतीय टीम पाकिस्तान दौरे पर गयी थी, तब राहुल द्रविड़ टीम के कप्तान हुआ करते थे, ये तो आप जानते ही होंगे कि भारत-पाकिस्तान की सीरीज हमेशा ही हाई वोल्टेज सीरीज रहती है,

उस समय 14 साल बाद साल 2004 में दोनों देशों के बीच क्रिकेट रिश्ते बहाल हुए थे, और इसी क्रम में भारतीय टीम 2004 के बाद 2006 में दोबारा पाकिस्तान गई थी, लाहौर  में  मैच  खेला जाना  था, और पिच को लेकर बड़ी बहस चल रही थी, और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ क्यूरेटर आगा जाहिद थे, जो बहुत ही टेढ़े अंदाज में जवाब देने के लिए जाने जाते थे.

Ajit Agarkar Wife

एक दिन भारतीय टीम गद्दाफी स्टेडियम में नेट प्रैक्टिस कर रही थी, अजित अगरकर का भी मन हुआ कि वो पिच को देखकर आएं, उन दिनों कप्तान और कोच पिच देख लिया करते थे और कभी कभार कुछ खिलाड़ी भी पिच से कवर हटाकर उसे हाथ लगाकर पिच को समझने की कोशिश कर लेते थे, हालाँकि कई जगहों पर ऐसा करने की मनाही भी थी,

लेकिन आइसीसी के टूर्नामेंट्स के अलावा किसी भी सीरीज में खिलाड़ियों द्वारा पिच देखने की मनाही का कोई नियम नही था, तो अगरकर भी जब पिच के पास पहुंचे तो उन्हें रोक दिया गया.

अगरकर ने पूछा- ” कि पिच क्यों नहीं देखी जा सकती है, तो उनसे कहा गया कि चीफ क्यूरेटर आगा जाहिद ने उन्हें किसी को भी पिच के पास जाने देने से मना किया है, अगरकर वहां से लौट आए, लेकिन उन्हें मन ही मन बहुत गुस्सा आया, इसके बाद जब टीम बैटिंग की प्रेक्टिस कर रही तब अगरकर का मन हुआ की कुछ लम्बे लम्बे शॉट्स लगाये जाएँ,

उन्होंने बाउंड्री के पार के हिस्से पर ऐसे ही शॉट्स लगाने शुरू किए, वो मैदान का बिल्कुल एक आखिरी कोना था, इसके बावजूद अजीत लंबे-लंबे शॉट लगा रहे थे, अगरकर के बल्ले से निकला एक शॉट सीधे जाकर मैदान के बीचोबीच गिरा, मतलब पिच के करीब उसी जगह, जहां ग्राउंड्समैन काम कर रहे थे, अचानक एक ग्राउंडमैन भागा-भागा आया

और उसने अगरकर से इस तरह बल्लेबाजी करने के लिए मना किया, इस बार अगरकर को ग़ुस्सा फूट ही पड़ा, उन्होंने पूछा कि अब बल्लेबाजी करने में किसे एतराज हो रहा है, ग्राउंड्समैन ने नाम लिया आगा जाहिद का, लेकिन अगरकर ने जानबूझकर उसकी बात अनसुनी कर दी.

और उन्होंने बल्लेबाजी करना जारी रखा, एक-दो गेंद सीधे खेलने के बाद उन्होंने फिर एक गेंद उसी तरफ मारी, ऐसा लग रहा था कि अगरकर जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं, इस बार आगा जाहिद खुद ही आ गए, उन्होंने अगरकर से बड़े रौबीले अंदाज में कहा कि वह इस तरह मैदान के अंदर शॉट न खेलें, अगरकर ने भी उसी अंदाज़ में पूछ लिया कि वो रोकने वाले कौन हैं,

आगा जाहिद ने अपना परिचय दिया तो अगरकर ने उसे भी अनसुना कर दिया, आगा जाहिद ने फिर कुछ टेढ़ी बात कही, इस पर अगरकर का ग़ुस्सा बढ़ गया उन्होंने बैट उठा ही लिया, अब तो बात तू-तू मैं-मैं से होकर अब हल्की गाली गलौज पर भी आ गई थी, कि तभी सचिन तेंदुलकर आ गए, उन्होंने अजीत को समझा बुझाकर रोका, तब जाकर मामला शांत हुआ, वरिष्ठ खेल पत्रकार शिवेंद्र कुमार सिंह ने अपनी किताब क्रिकेट के अनसुने किस्से में इस मामले की कहानी बयां की है.

Ajit Agarkar

अगरकर के निजी जीवन की बात करें तो उनकी शादी का किस्सा भी काफी रोचक है, दरअसल जब अगरकर ने भारतीय टीम में अपना डेब्यू किया था उस दौरान अगरकर के खास दोस्त मजहर अक्सर उनके क्रिकेट मैच देखने आते थे, मजहर के साथ उनकी बहन फातिमा भी आती थी, मजहर ने ही अपनी बहन की पहचान अगरकर से कराई, इसके बाद अगरकर और फातिमा एक-दूसरे से अक्सर मिलने लगे,

और दोनों की मुलाकात प्यार में बदलने लगी, दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन अलग धर्म होने की वजह से दोनों के घरवाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे, दरअसल हम आपको बता दें कि अगरकर मराठी ब्राह्मण परिवार से सम्बन्ध रखते हैं जबकि फातिमा मुस्लिम, यही वजह थी कि इन दोनों की लव स्टोरी शादी के मंडप तक चाहकर भी नहीं पहुंच पा रही थी,

लेकिन साल 2002 में अगरकर ने धर्म की हर दीवार को तोड़कर फातिमा को अपनाने का फैसला किया और उनसे शादी कर ली.

वनडे क्रिकेट में अजित अगरकर का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है, उन्‍होंने 191 वनडे मैचों में 288 विकेट लिए हैं, इस दौरान उन्होंने 10 बार मैच में चार और दो बार पांच विकेट लिए हैं, 42 रन देकर छह विकेट वनडे में उनका सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन रहा है, अगरकर ने 26 टेस्ट मैचों में 58 जबकि 4 टी20 इंटरनेशनल में 3 विकेट लिए हैं, 26 टेस्ट मैचों में उन्होंने 571 रन भी बनाए हैं,

जिसमें एक शतक भी शामिल है जबकि 191 वनडे मैचों की 113 पारियों में अगरकर ने 1269 रन बनाए हैं, जिसमें 3 अर्धशतक शामिल है, वनडे में उनका बेस्ट स्कोर 95 रन रहा है, अगरकर ने सबसे तेज 200 विकेट और हजार रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है, जब भारतीय टीम ने साल 2007 में सबसे पहला ट्वेंटी-20 कप जीता था, 

तब अजित अगरकर भी उस भारतीय टीम का सबसे अहम हिस्सा थे, अगरकर ने इस विश्व कप के 3 मुकाबलों में 1 विकेट लिया था, अगरकर 1999, 2003 और 2007 के एकदिवसीय विश्व कप में भी भारतीय टीम का हिस्सा थे, 5 सितंबर 2007 को इंग्लैंड के खिलाफ अजित ने अपना आखिरी वनडे मैच खेला, इसके बाद अगरकर आईपीएल में कई टीमों का हिस्सा बने, साल 2013 में अजीत ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास ले लिया.

अगरकर अपनी कप्तानी में मुंबई को रणजी ट्राफी भी जिता चुके हैं, अगरकर ने पुरे 75 साल बाद मुंबई को चैंपियन बनाया था, मुंबई के कप्तान अगरकर ने तब अपनी टीम के तेज गेंदबाज धवल कुलकर्णी के साथ मिलकर शानदार गेंदबाजी करते हुए मेजबान टीम ने सौराष्ट्र को मैच तीसरे ही दिन पारी और 125 रन से हराया था, अजीत निश्चित रूप से विलक्षण प्रतिभा के धनी थे,

अपने 16 साल लम्बे करियर में बतौर बल्लेबाज करियर शुरू करने के बाद वो गेंदबाजी में अधिक सफल हुए, पर एक ऑलराउंडर के रूप में वो दूसरे कपिल देव नही बन सके, लेकिन ऐसे आयाम जरूर स्थापित कर गये, जो आने वाले खिलाड़ियों के लिए मिसाल बन गये, नारद टीवी की टीम अजीत के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है.

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