‘सपने वो नहीं जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते’ ।पूर्व
राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का ये कथन अनगिनत आंखों की रोशनी है।सपना, एक शब्द
जो संभावनाओं और सच्चाई का आईना है।तो चलिये दोस्तों, उन्हीं सपनों का दामन थाम कर
20वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में चलते हैं।

मायानगरी मुंबई में कोच सुधीर नाइक की निगरानी में ट्रायल चल रहा था । एक दुबला-पतला लड़का चप्पल पहनें नेट्स की तरफ़ चला आ-रहा था। कोच सुधीर नाइक ने उस लड़के को चप्पल पहनकर गेंदबाज़ी करने से मना कर दिया। लड़का सिर नीचे कर के चला गया।कुछ देर बाद वही  लड़का साइज़ में थोड़े बड़े जूते पहन कर लौट आया।

लगातार 40 मिनट गेंदबाज़ी करने के बाद सुधीर नाइक ने उस लड़के को गेंद डालने से रोक
दिया।कुछ वर्षों बाद एक इंटरव्यू के दौरान सुधीर ने बताया – वो 40 मिनट के बाद भी थका नहीं
था।अगर , मैं उसे रोकता नहीं तो वो बल्लेबाज़ों को चोटिल कर देता। वो दुबला-पतला, 5 फ़ुट 11 इंच का बाएँ हाथ से गेंद डालने वाला लड़का कोई और नहीं बल्कि स्विंग के
सुल्तान ज़हीर खान थे।वो ज़हीर खान जिन्हें भारतीय गेंदबाज़ी का सचिन कहा जाता है।

ज़हीर खान का जन्म 7 अक्टूबर 1978 को श्रीरामपुर ,ज़िला अहमदनगर महाराष्ट्र में एक
मध्यम वर्गीय मराठी मुस्लिम परिवार में हुआ।ज़हीर के पिता बख्तियार खान उस
वक़्त फोटोग्राफ़र थे। हर मिडिल क्लास पिता की तरह उनका लक्ष्य तीनों बेटों ज़ीशान, ज़हीर
और अनीस को पढ़ा-लिखा कर  कामयाब इंसान बनाना था।दूसरी तरफ़ ज़हीर की अम्मी ज़ाकिया
खान ज़हीर के दोस्तों से उनकी गेंदबाज़ी की तारीफ़ आये दिन सुन कर ख़्वाबों का नया
आसमान तैयार कर रहीं थी।क्रिकेट के प्रति ज़हीर का लगाव देखकर पिता ने उन्हें इंजीनियर
बनाने के ख़्वाब को वक़्त की गहराइयों में दफ़्न कर दिया।ज़हीर ने ज़िन्दगी के शुरुआती दिनों
की पढ़ाई न्यू मराठी प्राइमरी स्कूल और के. जे. सोमैय्या सेकेंडरी स्कूल में हासिल की।क्रिकेट पर
ध्यान लगाने के लिये ज़हीर मुंबई तो आ-गये।लेकिन, ग़रीबी गले के हार की तरह उनके साथ
चल रही थी। कोच सुधीर नायक की मदद से उन्होंने एक पार्ट टाइम जॉब शुरू कर दी। ज़हीर
बताते हैं उन्होंने अपनी पहली किट उस जॉब की सैलरी से ख़रीदी थी।इसी दौरान उनका चयन एम. आर. एफ़. पेस फॉउंडेशन के लिये हुआ।जहाँ, उनकी मुलाक़ात महान ऑस्ट्रेलियाई तेज़
गेंदबाज़ डेनिस लिली से हुई। डेनिस ने उनकी गेंदबाज़ी देखकर कहा – ज़हीर तुम भारत के लिए
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट ज़रूर खेलोगे।

ज़हीर खान की गेंदबाज़ी को क्लब स्तर क्रिकेट में ख़ूब तारीफ़ मिल रही थी।21 साल की
उम्र में उनका बड़ौदा रणजी टीम में चयन हो गया।1999-2000 रणजी सीज़न में ज़हीर ने 8
मैच खेलकर 29.25 की शानदार औसत से 35 विकेट लिये।अगले ही साल रणजी ट्रॉफी फाइनल
में रेलवे के ख़िलाफ़ 8 विकेट लेकर ज़हीर खान ने बड़ौदा को 21 रन से मैच जिताने  में अहम
योगदान दिया।रणजी टॉफी फाइनल ‘मैन ऑफ़ द’ मैच ज़हीर खान एक दम से भारतीय
अंतरर्राष्ट्रीय क्रिकेट टीम चयनकर्ताओं की नज़र में चढ़ गए। साल 2000 के अन्त में आई. सी.
सी. नॉक-आउट ट्रॉफी के लिए केन्या जा-रही भारतीय टीम में ज़हीर खान का चयन हो गया।ज़हीर ने
अपने पहले ही एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच  में 3 विकेट लिये।जबकि, दूसरे  अंतर्राष्ट्रीय
मैच में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध क्वार्टर-फाइनल मुक़ाबले में एडम गिलक्रिस्ट और स्टीव वॉ जैसे
बल्लेबाज़ों के विकेट लेकर यादगार जीत में अहम योगदान दिया।ज़हीर खान ने अंतर्राष्ट्रीय
क्रिकेट में आगमन का बिगुल बजा दिया था।उसी साल ज़हीर ने बांग्लादेश के विरुद्ध सफ़ेद जर्सी
यानी टेस्ट में डेब्यू किया।ज़हीर खान ने अपने पहले अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच में 3 विकेट लिए ।

ज़हीर खान का क्रिकेट करियर  धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा था।ज़हीर खान नई गेंद को
विकेट के दोनों ओर स्विंग कराने और पुरानी गेंद को रिवर्स स्विंग कराने में माहिर थे।उनके
तरकश में शरीर की तरफ़ चढ़ती बाउंसर के साथ अँगूठा तोड़ यॉर्कर भी था ।इन सब हथियारों
में बाएँ हाथ का क़ुदरती कोण उनकी गेंदबाज़ी को और घातक बना देता था । ज़हीर खान की इस
क्षमता को उस समय की भारतीय टीम के कप्तान सौरव गांगुली ने कोच जॉन राइट के साथ
मिलकर निखारा। क्रिकेट विश्व कप 2003 में ज़हीर खान ,आशीष नेहरा और जवागल श्रीनाथ
की तिकड़ी सभी टीमों पर भारी पड़ी।इस विश्व कप में ज़हीर ने 20.77 की प्रभावशाली औसत
से 18 विकेट लिये। श्रीनाथ के संन्यास के बाद ज़हीर खान भारतीय पेस बैटरी को लीड करने
लगे।

जिस तरह लोहे को मज़बूती के लिए भट्टी से गुज़रना ज़रूरी है।उसी तरह महान खिलाड़ी
बनने के लिये मुश्किल दौर पार करना ज़रूरी है।ज़हीर खान के करियर  में ये दौर साल 2005 में
आया।उस साल ज़हीर भारत की ओर से 10 एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच में केवल 11 विकेट ले सके और चोट के कारण पूरे साल केवल 3 टेस्ट ही खेल पाये।एक तरफ़ ज़हीर निश्चित अन्तराल पर
चोटिल हो रहे थे और फ़ॉर्म खोज रहे थे तो दूसरी तरफ़ एस. श्रीसंथ , मुनाफ़ पटेल और आर. पी.
सिंह जैसे युवा गेंदबाज़ बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे थे।साथ ही ज़हीर का कॉन्ट्रैक्ट ग्रेड-बी से ग्रेड-
सी हो गया।हालात बद्तर होते जा-रहे थे। लेकिन, किसी ने ख़ूब कहा है ‘लम्बी छलांग मारने के
लिये दो क़दम पीछे जाना पड़ता है’। साल 2006 के लिए इंग्लैंड काउंटी क्रिकेट टीम वुरसे-स्टर-शाइर ने ज़हीर खान को टीम में लिया।ज़हीर ने वहां पिछले कुछ सालों के बुरे प्रदर्शन
को भूलकर एक नई कहानी लिखी।ज़हीर ने पहले ही मैच में दोनों पारियां मिलाकर 10 विकेट
लिये और सौ साल में ऐसा करने वाले पहले वुरसेस्टरशाइर के खिलाड़ी बनें।

एसेक्स के ख़िलाफ़ एक मैच में ज़हीर ने एक पारी में 138 रन देकर 9 विकेट अपने नाम किये।अगर, स्टीव डेविस ने कैच नहीं छोड़ा होता।तो, ज़हीर खान काउंटी क्रिकेट में एक पारी में 10 विकेट लेने वाले पहलेखिलाड़ी होते।इस बेहतरीन प्रदर्शन के परिणामस्वरूप ज़हीर ने पूरे सीज़न में रिकॉर्ड 78 विकेटलिए। इस प्रदर्शन की बदौलत उन्हें काउंटी क्रिकेट में “ज़िप्पी ज़ैकी”; कहा जाने लगा ।उनका ये प्रदर्शन और मुनाफ़ पटेल की चोट ज़हीर खान को भारतीय क्रिकेट टीम में वापिस ले आयी ।

फिर,जो हुआ वो अपने आप में इतिहास है।ज़हीर खान ने साल 2007 में इंग्लैंड दौरे पर 18 विकेट
लेकर, 21 साल बाद इंग्लैंड में भारत को 1-0 से सिरीज़ जितने  में अहम योगदान दिया।इस
सिरीज़ में माइकल वॉन ने कहा था -ज़हीर खान का विकेट लेने के बाद बाहें फैलाकर मुस्कुराते
हुए गुज़रना , चुभता है.

इस प्रदर्शन के बाद ज़हीर खान ने पीछे मुड़कर  नहीं देखा।फिर आया 2011 विश्व कप।जहाँ,
ज़हीर खान ने तजुर्बे और हुनर की नुमाइश करते हुए शाहिद अफ़रीदी के साथ संयुक्त रूप से
सर्वाधिक 21 विकेट अपने नाम किये।ज़हीर खान भारत की तरफ़ से विश्व कप में जवागल
श्रीनाथ के साथ संयुक्त रूप से सर्वाधिक 44 विकेट लेने वाले खिलाड़ी है।2011 विश्व कप के
दौरान इंग्लैंड के विरुद्ध बेंगलुरु में किया गया ,ज़हीर खान द्वारा वो 3 विकेट वाला स्पेल। आज
भी प्रत्येक भारतीय के ज़हन में ताज़ा है।ज़हीर खान ने 2011 विश्व कप फाइनल में अपने पहले
4 ओवर में 2 रन देकर 3 मेडेन के साथ 1 विकेट लेकर भारत को अविश्वसनीय शुरुआत दिलाई
। 2011 विश्व कप में भारतीय गेंदबाज़ी प्रदर्शन ज़हीर खान के इर्द गिर्द घूम रहा था।

इसी दौरान धोनी ने कहा था “ज़हीर भारतीय गेंदबाज़ी का सचिन है”। साल 2011 में ज़हीर खान
को भारतीय क्रिकेट में उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया ।
जबकि, साल 2008 में वो विज़डन क्रिकेटर्स ऑफ द ईयर रहे थे। ज़हीर खान बाएँ हाथ के
बल्लेबाज़ों के लिये काल थे।ज़हीर ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर  में 237 बार बाएँ हाथ के
बल्लेबाज़ों का विकेट लिया है।खब्बू बल्लेबाज़ों का विकेट लेने के मामले में साउथ अफ़्रीका के
शॉन पोलॉक और श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ही उनसे आगे हैं।ज़हीर खान का पूर्व दक्षिण
अफ़्रीकी कप्तान ग्रीम स्मिथ पर वर्चस्व जग ज़ाहिर है। क्रिकेट के सभी प्रारूपों में ज़हीर 27
पारियों में 14 बार स्मिथ को आउट कर चुके हैं।

साल 2011 के बाद ज़हीर चोट के कारण ज़्यादा खेल नहीं पाए।ज़हीर खान का 2014 में
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच उनका अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मैच साबित हुआ। 15 अक्टूबर 2015
को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेते वक़्त ज़हीर खान के नाम 620 अंतर्राष्ट्रीय विकेट थे । ज़हीर
खान ने टेस्ट में 32.95 की औसत से 311, वन डे में 29.44 की औसत 282 और टी-20
अंतर्राष्ट्रीय में 26.35 की औसत से 17 विकेट हासिल किए हैं। ज़हीर खान टेस्ट क्रिकेट में भारत
के लिए तेज़ गेंदबाज़ों में सर्वाधिक विकट लेने वाले खिलाड़ियों की श्रेणी में महान कपिल देव के
बाद दूसरे स्थान पर हैं। जबकि, 169 फर्स्ट क्लास मैच में रिकॉर्ड 672 विकेट एवं लिस्ट ए मैचों
में 357 विकेट अपने नाम किये हैं। ज़हीर खान ने कई मौकों पर बल्ले से भी कमाल दिखाया
है।साल 2000 में हेनरी ओलंगा को लगातार चार गेंदों पर चार छक्के लगाना हो या बांग्लादेश
के खिलाफ़ 2004 ढाका टेस्ट में नंबर 11 बल्लेबाज़ के रूप में 75 रनों की यादगार पारी। ज़हीर
खान ने 2008 से 2017 तक आई. पी. एल. में मुंबई इंडियन्स, दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल
चैलेंजर्स बैंगलोर की ओर से खेलते हुए 100 मैचों में 27.27 की औसत से 102 विकेट लिए।

ज़हीर खान ने 23 नवंबर 2017 को फ़िल्म चक दे इंडिया फ़ेम, एक्ट्रेस सागरिका घटगे से
शादी की।सागरिका राष्ट्रीय स्तर की हॉकी प्लेयर रह चुकी हैं। ज़हीर खान ने साल 2017 में
भारतीय क्रिकेट गेंदबाज़ी कोच की भूमिका निभाई थी।क्रिकेट से ज़हीर का प्रेम कमेंटेटर के रूप
में जारी है। इसी दुआ के साथ कि ज़हीर खान का क्रिकेट प्रेम यूँ ही जारी रहे और आगे की
ज़िंदगी का सफ़र यादगार रहे।नारद टी. वी. की ‘अनसंग हीरो’ सीरीज़ में आज के लिए बस  इतना
ही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!