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कैसे हुई देवों के देव भगवान शिव की उत्पत्ति ?

हिंदू धर्म ग्रंथों और पुराणों के अनुसार भगवान शिव से ही समस्त सृष्टि का उद्भव होता है। संपूर्ण सृष्टि के अधिपति भगवान शिव जन्म व मृत्यु से परे हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव को ही संहार का देवता भी माना गया है।

 जिस प्रकार हर युग में भगवान विष्णु ने भिन्न-भिन्न अवतार लिये हैं वैसे ही भगवान शिव ने भी ढेरों अवतार लिये।

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव के कुल  28 अवतार हैं और इन्हीं में से एक, जिसे 11वां रूद्र अवतार कहते हैं वो पवनसुत हनुमान का था।

 भगवान शिव को भगवान विष्णु का परम भक्त भी कहा जाता है। जिसका उल्लेख वेदों, पुराणों, ग्रंथों, संहिताओं और लगभग प्रत्येक शास्त्रों में भी किया गया है।

 पौराणिक कथाओं के अनुसार जब अधर्म का नाश करने तथा धर्म की रक्षा करने हेतु भगवान विष्णू ने श्रीराम का अवतार लिया था तब भगवान शिव ने भी अपने आराध्य भगवान विष्णु की सहायता हेतु संकट मोचन हनुमान का अवतार लिया था।

 विभिन्न शास्त्रों के अतिरिक्त रामचरितमानस आदि में भी रामभक्त हनुमान को शिव का ही अवतार बताया गया है।

भगवान शिव के अवतारों से जुड़ी कथाओं का वर्णन तो हमें पढ़ने तथा सुनने को मिल जाता है परन्तु देवों के देव शिव की उत्पत्ति कैसे हुई या उनका जन्म कैसे हुआ इन विषयों पर हमें कम ही पढ़ने व सुनने को मिल पाता है।

भगवान शिव के जन्म से जुड़ी भिन्न-भिन्न कथायें हैं जो विभिन्न पुराणों व ग्रंथों में पढ़ने व सुनने को मिलती हैं।श्रीमद् भागवत के अनुसार भगवान शिव की उत्पत्ति से जुड़ी कथा कुछ इस प्रकार है।

एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा के मन में इस बात का अहंकार आ गया कि वे सर्वश्रेष्ठ हैं। परंतु इसी विषय पर कि कौन किससे श्रेष्ठ है उनमें बहस बहस होने लगी।

बहस आगे बढ़ने के बाद भी जब कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो उसे समाप्त करने हेतु अकस्मात ही उनके मध्य एक खम्भे के समान ज्योति प्रकट हुई जो कि अनंत थी।

तय हुआ कि जो इस ज्योति के अंतिम भाग तक पहले पहुँचेगा वो श्रेष्ठ मान लिया जायेगा परंतु उस ज्योति का न कोई ओर था न कोई छोर ऐसे में दोनों देवों को अपनी पराजय स्वीकार करनी पड़ी और तभी प्रथम बार भगवान शिव इस ज्योति के मध्य में प्रकट हुए।

Lord Shiva Birth

श्रीमद् भागवत के अतिरिक्त विभिन्न पुराणों में जो कथायें बताई गयीं हैं उन कथाओं में बहुत विरोधाभास देखने को मिलता है।

बात करें यदि शिव पुराण और विष्णु पुराण की तो शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयंभू हैं जबकि विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु को स्वयंभू माना गया है।

शिव पुराण के अनुसार जो कथा बताई जाता है वो यह है कि एक बार भगवान शिव अपने टखने पर अमृत का लेप कर रहे थे तब उससे भगवान विष्णु का जन्म हुआ।

वहीं विष्णु पुराण के अनुसार भगवान शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न हुए बताए गए हैं, यहाँ तक कि भगवान ब्रह्मा भी भगवान विष्णु की नाभि से निकले कमल से पैदा हुए थे यह भी बताया गया है।

 साथ ही यह भी बताया गया है कि माथे के तेज से उत्पन्न होने के कारण ही भगवान शिव हमेशा योगमुद्रा में रहते हैं। 

विष्णु पुराण में शिव के बाल रूप का भी वर्णन किया गया है। एक कथा के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा ने संतान प्राप्ति हेतु कड़ी तपस्या की ऐसे में भगवान विष्णु के वरदान के फलस्वरूप उनकी गोद में भगवान शिव एक शिशु के रूप में प्रकट हुए।

प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रुद्र’ रखा परंतु शिव इस नाम को सुनकर रोने लगे तब भगवान ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया, पर शिव को वह नाम भी पसंद नहीं आया और वे रोते रहे।

भगवान शिव को चुप कराने हेतु भगवान ब्रह्मा ने एक-एक करके उनके कुल 8 नाम रखे जो हैं- रुद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव।

हालांकि भगवान शिव के सहस्त्रों नाम हैं जिनमें जिनमें सबसे प्रचलित नाम शंकर और महेश हैं जो पुराणों के अनुसार बताये गये हैं। 

भगवान शिव को एक बार इस संसार को बचाने हेतु विषपान भी करना पड़ा था, उस महाविनाशक विष को महादेव ने अपने कंठ में धारण कर लिया जिस कारण उन्हें नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है।

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शिवपुराण में वर्णित सतरुद्रसं​हिता के अनुसार, सृष्टि के आदि में जब सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी की रची हुई सारी प्रजाओं का विस्तार न हो सका, तो वे दुखी हो गए। उसी समय आकाशवाणी हुई। हे ब्रह्मदेव! अब मैथुनी सृष्टि की रचना करो।

इस आकाशवाणी को सुनकर ब्रह्मा जी के मन विचार आया कि वे भगवान शिव की कृपा के बिना मैथुनी प्रजा उत्पन्न नहीं कर सकते। तब वे तप करने लगे।

कुछ समय बाद शिवजी प्रसन्न होकर पूर्ण सच्चिदानंद की कामदा मूर्ति में प्रवेश कर गए और आधे नर और आधी  नारी के स्वरूप में ब्रह्मा जी के समक्ष प्रकट हो गए। शिव जी के इस रूप के कारण उन्हें अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है।

इन नामों के अतिरिक्त जो भगवान शिव के अन्य प्रचलित नाम हैं वो हैं- महाकाल, भोलेनाथ, शम्भु, नटराज, आदिदेव, जटाधारी, उमापति, लिंगम और कैलाशपति इत्यादि।

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Prabhath Shanker

Bollywood Content Writer For Naarad TV

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