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भारत में क्रिकेट का जूनून किसी से छुपा नही है, आज हर शहर, हर कस्बा, हर गाँव और हर गली में सैकड़ों बच्चे क्रिकेट को पूरी शिद्दत और जुनूनियत के साथ खेलते हैं,  कुछ तो इसे खेल भर ही मानते हैं लेकिन कुछ क्रिकेट में ही जीते है, और क्रिकेट खेलते हुए ही अपने आने वाले भविष्य के सपने संजोते हैं, लेकिन आजादी से पहले की बात करें तो ऐसा नही था, उस दौर में हॉकी का बोलबाला था, और क्रिकेट को लोग फिरंगियों का खेल कहते थे और अंग्रेज इसे जेंटलमैन गेम कहते थे और उनका मानना था कि भारतीय इस खेल को कभी खेल ही नही सकते, लेकिन भारतीय हमेशा ही ऐसी हजारों चुनौतियों को पार करते रहे हैं, तो इस चुनौती में भारयीय पीछे कैसे रहते, तो भारत में क्रिकेट को फैलाने का काम किया  श्री रणजीत सिंह विभाजी जडेजा ने, रणजीत सिंह गुजरात के नवानगर के राजपूत राजा थे, और वो पहले भारतीय थे, जिन्होंने इंग्लैंड में पहले ससेक्स और फिर इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेला, बाद में इन्ही के नाम पर भारत में सबसे प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी की शुअरुआत हुई जो आज भी खेली जाती है, और इसी घरेलू सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भारतीय टीम में जगह मिलती है, इनके अलावा कुमार श्री दलीप सिंह जडेजा, जिनके नाम पर भारत में दलीप ट्रॉफी खेली जाती है, वो भी इसी परिवार के सदस्य थे।

Ranjit Singh Jadeja

क्रिकेट के लिए मशहूर इसी शाही परिवार में 1 फरवरी 1971 को जामनगर में जन्म हुआ था अजय सिंह जडेजा का, इनका पूरा नाम अजय सिंह दौलत सिंह जी जडेजा था, हम आपको बता दें कि राजा रणजीत सिंह जी अजय के पिता के दादा जी के भाई थे, तो दलीपसिंह जी अजय के पिता के चाचा थे, इस तरह क्रिकेट तो अजय की नस नस में था और इन्हें विरासत में ही मिला था, अजय अपने परदादा और दादा जी के पदचिन्हों पर चलते हुए महान खिलाड़ी बनना चाहते थे, इसीलिए अजय बचपन से ही क्रिकेट खेलने लगे और हरियाणा की रणजी टीम का हिस्सा बन गये, जडेजा का सपना साल 1992 के विश्वकप में पूरा हुआ जब उन्हें विश्वकप के लिए चुनी गयी भारतीय टीम में चुना गया, जडेजा ने अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज इसी विश्वकप में श्रीलंका के खिलाफ किया था, यह जडेजा का पहला वनडे मैच था, हालांकि बारिश के कारण ये मैच पूरा नही हो सका था और अजय को पहले मैच में अपना हुनर दिखाने का मौका नही मिला, भारत का अगला मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुआ, जिसमे भारत को हार का सामना करना पड़ा, इस मैच में अजय सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हो गये, फिर भारतीय टीम का मुकाबला हुआ पाकिस्तान से, इस मैच में अजय को भारतीय टीम की पारी शुरू करने का मौका मिला और उन्होंने 46 रनों की पारी खेलकर अपने हुनर की झलक दिखला दी, इसके बाद उनका प्रदर्शन लगातार निखरने लगा, हालांकि टेस्ट टीम में आने में उनको करीब 10 महीने इंतजार करना पड़ा, लेकिन नवंबर 1992 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ जडेजा ने टेस्ट डेब्यू भी कर किया, अगले कुछ सालों तक जडेजा का करियर ऐसे ही चलता रहा, और उन्होंने अपनी जगह टीम में पुख्ता कर ली थी.

Ajay Jadeja

फिर 1996 का विश्वकप आया, जो जडेजा के लिए काफी अहम साबित हुआ, अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और शानदार फील्डिंग के लिए मशहूर रहे अजय जडेजा ने 1996 वर्ल्ड कप के क्वार्टरफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम ओवरों में 25 गेंदों में ताबड़तोड़ 45 रनों की पारी खेली थी, जडेजा को पाकिस्तान के खिलाफ खेले गये इस मैच में अपनी तूफानी पारी के चलते आज भी खूब याद किया जाता है, हम आपको बता दें कि इन्होंने उस समय जबरदस्त पारी खेलकर भारतीय टीम को जीत दिलाई थी, इस मैच में जडेजा ने अंतिम 4 ओवरों में ऐसा कुछ कर दिखाया था, जिसे कोई नहीं भूल सकता, भारत ने इस मैच की आखिरी 24 गेंदों में छक्के और चौको की मदद से 51 रन बनाए थे, जोकि उस दौर में किसी चमत्कार से कम नही था, लेकिन पूरी दुनिया ने इस चमत्कार को देखा था और इसे कर दिखाया था अजय जडेजा ने, इसमें जडेजा ने वकार यूनूस के एक ओवर में 22 रन जड़े थे, इस पारी में जडेजा ने 45 रन बनाए थे, जिसके चलते टीम इंडिया 50 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 287 रन बना पाने में कामयाब हुई, लक्ष्य का पीछा करते हुए पाक टीम 39 रन से पीछे रह गई थी और भारत ने पाक को हराकर वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में जगह बनाई थी, इसका पूरा श्रेय अजय जडेजा को जाता है, जडेजा ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने क्रिकेट के मैदान पर मार भी खाई, अगर आप क्रिकेट या कोई भी खेल खेलते होंगे तो ये बात अच्छी तरह से जानते होंगे कि खेल के मैदान पर खिलाड़ियों के बीच हल्की फुल्की नोंक-झोंक तो होती ही रहती है, मगर इतिहास के पन्नों को खंगाले तो कभी-कभी ये नोकझोंक और बहस लड़ाई में भी तब्दील हो जाती है, अजय जडेजा के साथ भी 1991 में ऐसा ही हुआ था, क्रिकइन्फो पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जमशेदपुर में नार्थ जोन और वेस्ट जोन के बीच दलीप ट्रॉफी का फाइनल मैच खेला जा रहा था, इस मैच में अजय जडेजा अपने साथी खिलाड़ी रमन लांबा के साथ नार्थ जोन की तरफ से बैटिंग करने मैदान पर आए, वेस्ट जोन के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज राशिद पटेल ने अपनी तेज रफ्तार गेंदों से रमन को काफी परेशान किया, मैच का 10वां ओवर चल रहा था कि राशिद की एक गेंद रमन के सिर के पास से निकली, तब रमन ने कुछ कह दिया, फिर क्या था राशिद स्टंप लेकर रमन को मारने दौड़ पड़े, जडेजा जब बीच-बचाव करने आए तो उनको भी स्टंप से मार लगी, इसके बाद दर्शकों ने मैदान में पत्थर फेंकना शुरु कर दिया, जिसके बाद मैच तुरंत रोक दिया गया.

Ajay Jadeja

उनके करियर का एक और यादगार अवसर था जब उन्होंने भारत के लिए मैच जीतने के लिए शारजाह में इंग्लैंड के खिलाफ 1 ओवर में 3 रन देकर 3 विकेट लिए थे और अपनी गेंदबाजी से भारत को मैच जिताया था, जडेजा ने 13 वन-डे मैचों में भारत की कप्तानी भी की है, वह एक नॉर्मल फैमिली से बिलौन्ग करती थीं, स्टेटस को लेकर अजय जडेजा का परिवार उनके नाखुश था, स्टेटस के चलते परिवार का नाखुश होना तो जडेजा के लिए एक समस्या पहले से ही थी, इसी बीच जडेजा का नाम अजहरुद्दीन के साथ फिक्सिंग में उछला, फिक्सिंग में नाम आने के बाद माधुरी ने उनसे दूरी बना ली, और ये प्रेम कहानी पूरी नही हो सकी, मैच फिक्सिंग में नाम आना अजय के क्रिकेट जीवन और उनके करियर का सबसे बड़ा ग्रहण साबित हुआ, दरअसल उस दौरान दिल्ली पुलिस ने दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए और बिजनेसमैन संजय चावला की रिकॉर्डिंग सुनी थी, इस प्रकरण में भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुरुद्दीन और अजय जडेजा का नाम आया था, हैंसी क्रोनिए ने दक्षिण अफ्रीकी कोर्ट के सामने मैच हारने के लिए रुपये लेने की बात स्वीकार की थी, उन्होंने बताया था कि 1996 में कानपुर टेस्ट मैच को गंवाने के लिए उन्होंने एक बुकी से रुपये लिए थे, इस प्रकरण में अजहरुद्दीन के अलावा अजय जडेजा, निखिल चोपड़ा और नयन मोंगिया का नाम आया भी था,  इसके बाद बीसीसीआई ने अजहर पर आजीवन और जडेजा सहित अन्य खिलाडियों पर पांच पांच साल का प्रतिबंध लगाया था, इसी बीच अजय जडेजा ने अदिति जेटली से शादी कर ली, अदिति देश के एक बड़े राजनीतिक परिवार से संबंधी रखती है, अदिति की मां जया जेटली समता पार्टी की अध्यक्ष थीं, पेशे से बेली डांसर अदिति भी उनसे काफी प्रभावित थी, घरवालों की मंजूरी से दोनों ने शादी कर ली, साल 2003 में अदालत ने जडेजा के ऊपर लगा प्रतिबंध भी हटा लिया, लेकिन हैन्सी क्रोनिये की इस गलती से अजय का करियर खत्म हो गया था, इसके बाद अजय ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास ले लिया.

Ajay Jadeja

दाएं हाथ के मध्यक्रम बल्लेबाज अजय जडेजा ने 15 टेस्ट खेलकर 576 रन बनाए थे, इसमें 4 अर्धशतक शामिल हैं, हालांकि टेस्ट की तुलना में जडेजा के वनडे क्रिकेट के आंकड़े ज्यादा बेहतर हैं, जडेजा के नाम 196 वनडे मैचों में 37.47 की औसत से 5359 रन दर्ज हैं, इस दौरान उनके बल्ले से 6 शतक और 30 अर्धशतक निकले, जडेजा के नाम 20 इंटरनेशनल विकेट भी दर्ज हैं ये विकेट उन्होंने एकदिवसीय मैचों में लिए थे

जडेजा ने क्रिकेट के मैदान के अलावा फ़िल्मी पर्दे पर हाथ आजमाया, क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद अजय ने फिल्म ‘खेल’ के जरिए बॉलीवुड में इंट्री मारी, इस फिल्म में सुनील शेट्टी, सेलिना जेटली और सनी देओल भी शामिल थे इसके बाद साल 2009 में मूवी पल पल दिल के साथ और काय पो छे में भी जडेजा ने काम किया था, जडेजा ने झलक दिखला जा सहित कई टीवी शो में हिस्सा भी लिया

साल 2015 में, जडेजा को दिल्ली क्रिकेट टीम के लिए मुख्य कोच के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया, वर्तमान में जडेजा क्रिकेट कमेंटेटर हैं और कई न्यूज़ चैनलों पर क्रिकेट विश्लेषक के रूप में शामिल होते हैं, मैच फिक्सिंग की काली छाया ने कई क्रिकेटरों का करियर बरबाद कर दिया, जिनमे से अजय जडेजा भी एक रहे, हालाँकि सुकून की बात ये रही कि अजय इस दलदल से सुरक्षित बाहर निकल आये, और उन पर लगा दाग हट गया, नारद टीवी की टीम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है.

Anurag Suryavanshi

By Anurag Suryavanshi

Hello! I am Anurag Suryavanshi, The founder of Naarad TV, The same Naarad TV to which your eternal love has garnered more than 1.5 million subscribers in just two years.....Now the road ahead is also very difficult, let's go together and share love and happiness in the whole world. मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

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