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दोस्तों कहा जाता है लोगों को रुलाना तो बहुत आसान है लेकिन हँसाना बहुत मुश्किल काम है, फिर चाहे वो आम जीवन हो या अभिनय। एक अभिनेता के लिये लोगों को हँसाना वो भी बग़ैर किसी ख़ास मेकअप के तो और भी मुश्किल हो जाता है, अगर वह एक संतुलित अभिनेता न हो। क्योंकि कभी-कभी दर्शकों को हँसाने के प्रयास में अभिनेता ओवर ऐक्टिंग के भी शिकार हो जाते हैं और दर्शक हँसने के बजाय इरिटेट होने लगते हैं। बेहतरीन टाइमिंग, संवाद अदायगी, एक्सप्रेसन्स और बॉडी लैंग्वेज को ताल मेल के साथ इस्तेमाल करने वाले अभिनेता ही एक सफल हास्य अभिनेता बन पाते हैं और दर्शकों को हँसाने में कामयाब होते हैं। ऐसे ही एक परफेक्ट सहायक और हास्य अभिनेता हैं जिन्हें उनके नाम से भले ही कम लोग जानते हों लेकिन उनके चेहरे और काम को कोई नज़र अंदाज़ नहीं कर सकता है। और उस अभिनेता का नाम है ‘मनमौजी’। अब तक तो शायद आप समझ ही गये होंगे कि हम किस अभिनेता की बात कर रहे हैं।

नमस्कार दोस्तों मैं अनुराग सूर्यवंशी स्वागत है आपका नारद टीवी पर।

40 के दशक में जन्मे अभिनेता मनमौजी जी का असली नाम राम मोहन मिश्र है और वो रहने वाले थे उन्नाव के दुबेपुर गांव के जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित है। ‘ द गवर्नमेंट टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट ऑफ कानपुर’ से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद वर्ष 1972 में मनमौजी जी मुंबई चले गये जहाँ वे स्वान, सेंचुरी और एम्पायर जैसी बड़ी मीलों में बतौर टेक्निकल एडवाइज़र काम करने लगे।

फिल्मों में काम करने की बात को मनमौजी भाग्य के साथ जोड़ते हुये कहते हैं कि शायद यह उनके भाग्य में पहले से ही लिखा था। दोस्तों फिल्मों से जुड़ने की उनकी कहानी बहुत ही दिलचस्प है, उन्होंने बताया कि वर्ष 1973 में एक बार जब वे एम्पायर मिल में अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे तभी उनके पास वॉचमेन आके बोला कि कोई बहुत बड़ा ऐक्टर मिल के किसी कर्मचारी से मिलना चाहता है। वॉचमेन की बात सुनकर मनमौजी तुरंत बाहर गये तो उन्होंने देखा कि उनके सामने दिग्गज अभिनेता महमूद खड़े हैं। महमूद ने मनमौजी जी से हाथ मिलाते हुये रिक्वेस्ट किया कि  कुछ देर के लिये वे अपनी अम्पाला कार को मिल के कैम्पस में खड़ी करना चाहते हैं। महमूद ने कहा कि थोड़ी देर बाद अपने ड्राइवर के साथ आकर वो अपनी कार वापस लेते जायेंगे। दरअसल पास में ही फेमस स्टूडियो था जहाँ महमूद को जाना था लेकिन वहाँ उनकी कार पार्क करने के लिये कोई सुरक्षित जगह ख़ाली नहीं थी इसलिए वे अपनी कार वहाँ खड़ी करना चाह रहे थे। महमूद जैसे बड़े ऐक्टर को ना करने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता था। मनमौजी ने उनसे निश्चिंत हो कर जाने को कहा। और जब महमूद अपनी कार लेने वापस आये तो उन्होंने मनमौजी को बुलाकर शुक्रिया कहा, साथ ही अपना कार्ड देकर अपने बंगले पर मिलने को भी बुलाया। 

Manmauji

जब मनमौजी महमूद से मिलने उनके बंगले पर पहुँचे तो उनके सिक्यूरिटी गार्ड ने उनसे कहा कि साहब अभी नहीं मिल सकते, वो व्यस्त हैं। मनमौजी के यह बताने पर भी कि उन्होंने ही मिलने को बुलाया है तो भी गार्ड नहीं माना। हारकर मनमौजी जब वापस जाने लगे इसी बीच महमूद के कानों में गार्ड की आवाज़ सुनाई देने से उन्होंने खिड़की से देख लिया और मनमौजी को वापस बुलवा लिया साथ ही गार्ड को समझा दिया कि उनके लिये इस घर के दरवाज़े हमेशा खुले रहेंगे। बहरहाल मनमौजी महमूद साहब के बंगले पहुँचे जहाँ उनकी मुलाक़ात उस दौर के ढेरों नामी कॉमेडियन्स से हुई। वे मुकरी, भगवान दादा और सुन्दर जैसे ऐक्टर्स के अलावा अमिताभ बच्चन से भी मिले जो उस वक़्त महमूद के घर पर ही रहते थे और उनकी कार से ही चला करते थे।

मनमौजी भी मज़ाकिया स्वभाव के थे वे अक्सर चुटकुले सुनाते और मिमिक्री किया करते जो महमूद साहब को बहुत पसंद आते। उसी दौरान संजीव कुमार और जया भादुड़ी की फिल्म नौकर के लिये कलाकारों का सेलेक्शन हो रहा था, इस फिल्म में महमूद के कहने पे मनमौजी को उनके साथ जूनियर आर्टिस्ट का काम मिल गया। इस फिल्म के बाद उन्होंने महमूद की कई और फिल्मों में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम किया।

उसी दौरान अभिनेता सुनील दत्त और फ़िरोज़ ख़ान अभिनीत फिल्म ‘दरिंदा’ की कास्टिंग पर काम चल रहा था। फिल्म के निर्देशक कौशल भारती जी ने मनमौजी से कहा कि अगर वे गंजे हो सकते हैं तो वे उन्हें जॉनी वाकर जी के साथ एक बढ़िया रोल दे सकते हैं।बस क्या था मनमौजी तुरंत बाहर गये और पास ही फूटपाथ पर बैठे एक नाई से अपने सिर के बाल पूरी तरह मुंडवा के 10 मिनट के अंदर निर्देशक कौशल भारती के सामने आकर खड़े हो गये। अचानक उनके गंजे रूप को देखकर अभिनेता सुनील दत्त की तो हँसते हँसते हालत ख़राब हो गयी। वर्ष 1977 में प्रदर्शित इस फिल्म के बाद मनमौजी का गंजापन ही उनकी ख़ास पहचान बन गया और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मनमौजी बताते हैं कि कई वर्षों तक 3-4 शिफ्ट में लगातार काम करते रहने से उन्हें कभी अपने  बाल बड़े करने का मौक़ा ही नहीं मिल सका क्योंकि उन्हें गंजे आदमी के रोल में ही अधिकतर कास्ट किया जाता था।

 मनमौजी जी की कॉमिक टाइमिंग लोगों के साथ-साथ फिल्म निर्देशकों को भी इतना भायी कि उन्हें उस दौर की लगभग हर दूसरी फिल्म में कोई न कोई रोल मिल ही जाता था। इस फिल्म के बाद तो वे एक के बढ़कर एक कई सफल फिल्मों में बतौर कॉमेडियन नज़र आते ही रहे। नसीब, गौतम गोविंदा, सत्ते प सत्ता, भगवान दादा, नगीना, पाप की दुनिया, दिल बाज़ीगर, आँखें, दूल्हे राजा, घरवाली बाहरवाली और फिर हेरा फेरी जैसी ढेरों फिल्मों में उन्होंने छोटे छोटे हास्य किरदारों को निभाया। उनकी फिल्मों की फेहरिसत इतनी लम्बी है कि उन्हें गिनना और उनके नाम लेना संभव नहीं है। 

Manmauji

दोस्तों आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि अभिनेता मनमौजी का नाम 1000 से भी अधिक फिल्मों में काम करने के लिये ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज हो चुका है।

80 के दशक से लेकर अब के दौर तक, महेश भट्ट से लेकर डेविड धवन तक हर निर्देशक के वे पसंदीदा अभिनेता रहे हैं। डेविड धवन की तो लगभग हर फिल्म में ही मनमौजी का कोई न कोई रोल होता ही था। किरदार और दृश्य कैसे भी हों, उनके साथ कोई भी अभिनेता क्यों न हो, उन्होंने बहुत ही सहजता से अपना काम किया और अपनी छाप छोड़ने में सफल भी रहे। मनमौजी की अपनी मौलिक संवाद अदायगी भी उनकी एक अलग पहचान बनाने में सहयोग प्रदान करती है। 

बॉलीवुड के कॉमेडियन्स के बीच एक अलग पहचान  रखने वाले मनमौजी न सिर्फ हिंदी बल्कि भोजपुरी फिल्मों का भी एक जाना माना नाम हैं। उन्होंने ढेरों भोजपुरी फिल्मों के साथ-साथ हिंदी और भोजपुरी धारावाहिकों में भी अपनी छाप छोड़ी है। मनमौजी हिंदी धारावाहिक ‘क्या मस्त है लाइफ’ में भी नज़र आये थे।

वर्ष 2012 में मनमौजी एक बार चर्चा में तब आये थे जब नेता अन्ना हजारे पर आधारित एक फिल्म के लिये यह घोषणा की गयी कि अन्ना का किरदार हास्य अभिनेता मनमौजी निभाएंगे। उस वक़्त वे अचानक ख़बरों  में छा गये थे। फिल्म के निर्माता मनीष गुप्ता के मुताबिक, उन्होंने अन्ना के किरदार के लिए करीब 30 से 40 अभिनेताओं का ऑडिशन लिया था लेकिन मनमौजी ही उस किरदार में बिल्कुल फिट बैठे। क्योंकि वह न केवल अन्ना हजारे जैसे दिखते हैं, बल्कि उनकी कद काठी भी उन्हीं के जैसी है।

दोस्तों मनमौजी आज भी बतौर अभिनेता सक्रिय हैं। वे वर्ष 2020 की हालिया रिलीज़ जाने माने अभिनेता संजय मिश्रा की फिल्म ‘हर किस्से के हिस्से कामयाब’ में भी नज़र आ चुके हैं।

अभिनेता मनमौजी अपनी बेबाक राय रखने के लिए भी जाने जाते हैं वर्ष 2019 में उनका जब एक बार अपने गृह जनपद उन्नाव में आना हुआ तो मीडिया से बातचीत के दौरान मनमौजी ने फिल्मी हस्तियों के चुनाव लड़ने के सवाल पर बोलते हुए कहा कि फ़िल्म एक्टरों को बिल्कुल चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। इसकी वज़ह उन्होंने यह बताई कि अनपढ़ जनता क्रेज के कारण उन्हें मंत्री, विधायक, सांसद तो बना देती है, लेकिन एयर कंडीशन में रहने वाले फिल्मी दुनिया के लोग फील्ड में नहीं जा सकते, धूप में नहीं जा सकते, भीड़ में नहीं जा सकते हैं और घर बैठ जाते हैं और फिर 5 साल बाद जब चुनाव का समय आता है तो वोट मांगते हैं।

Manmauji

बात करें मनमौजी जी के निजी जीवन की तो उनकी पत्नी का नाम किरन मिश्रा था जो कि अब इस दुनियाँ में नहीं हैं। दोस्तों मनमौजी जी और उनकी स्वर्गीय पत्नी के बारे में एक बात जानकर आपको उनपे बहुत ही गर्व होगा। दरअसल लोगों को इस बात की जानकारी मीडिया के ज़रिये तब मिली जब 63 वर्ष की आयु में मनमौजी जी की पत्नी की मृत्यु हुई और उन्होंने अपनी पत्नी का शरीर मुंबई के ‘जे. जे. हॉस्पिटल’ को दान कर दिया ताकि उनके ऑर्गन्स दूसरे ज़रूरतमंदों के काम आ सकें। मुंबई के न्यूज़ पेपर ‘मिड डे’ में दिये एक साक्षात्कार में मनमौजी जी ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी किरन मिश्रा जी ने 25 वर्षों पहले ही अपना शरीर और उसके ऑर्गन्स को दान और रिसर्च हेतु हॉस्पिटल के नाम गिरवी रख दिया था ताकि उनकी मृत्यु के बाद उनका शरीर किसी के काम आ सके और चिकित्सा के क्षेत्र में नये रिसर्च के लिये भी मदद हो सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पत्नी की इच्छा को पूरी करने के लिये उनके शरीर को हॉस्पिटल को सौंप दिया है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि जब उनकी पत्नी किरन जी की मृत्यु हुई तो उन्होंने उनकी बॉडी डोनेट करने के लिये पहले मुंबई के ‘सायन हॉस्पिटल’  से संपर्क किया लेकिन उस हॉस्पिटल से कोई रिस्पांस नहीं मिला तब उन्होंने जे जे हॉस्पिटल से संपर्क किया। हॉस्पिटल के डीन डॉक्टर लहाणे ने बताया कि मनमौजी जी जैसे ऐक्टर्स के ऐसे क़दमों से समाज को एक प्रेरणा मिलती है। मनमौजी जी ने मीडिया से कहा कि उन्हें यह जानकर बहुत ख़ुशी हुई थी कि ऐश्वर्या राय जैसी अभिनेत्रियाँ भी जीते जी अपनी आँखें दान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हम जीते जी लोगों को हँसाते रहे हैं अब मरने के बाद भी किसी के काम आयेंगे। हमारी आँखें किसी को रोशनी दे सकती हैं और हमारी किडनी किसी को नयी ज़िन्दगी। मनमौजी जी फिलहाल अपने बच्चों के साथ मुंबई में एक ख़ुशहाल जीवन गुज़ार रहे हैं।

दोस्तों फिल्मों में छोटे-छोटे किरदारों को निभाने वाले मनमौजी जी जैसे मंजे हुये अभिनेताओं के बिना कोई फिल्म पूर्ण नहीं हो सकती है क्योंकि फिल्म में उस कहानी का हर किरदार उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि फिल्म के मुख्य किरदार। नारद टी वी मनमौजी जी सहित उन तमाम अभिनेताओं को सलाम करता है जो फिल्मों में अपने छोटे छोटे किरदारों को अपनी दमदार अदायगी से ख़ास बना देते हैं।

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