भारतीय  फिल्म जगत और खेल जगत का साथ हमेशा से ही रहा है यह कोई नयी बात नहीं है, और बात क्रिकेट की हो तो यह खेल इस मामले में सबसे आगे है क्योंकि आये दिन फिल्मी दुनिया और क्रिकेट से जुड़ी कोई ना कोई ख़बर सामने आती ही रहती है। कभी किसी सेलेब्रेटी के अफेयर की चर्चा या फिर कोई अलग कंट्रोवर्सी ।

लेकिन ऐसा भी  नहीं है कि क्रिकेट और फिल्मी दुनियाँ का संबंध सिर्फ अफेयर और कॉन्ट्रोवर्सीज़ तक ही सीमित है ।देेेश में जब भी कोई आपदा आयी, फिल्म जगत और क्रिकेट जगत ने हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर देश  सेवा में बढ़ चढ़कर अपना योगदान दिया है। राज कपूर, दिलीप कुमार से लेकर बाॅबी देओल तक हर दौर के अभिनेता-अभिनेत्रियों ने ऐसे मौकों पर चैरिटी के लिये क्रिकेट खेलकर देश की आर्थिक मदद की । यह देश प्रेम की भावना 70 के दशक से लेकर कर आज तक बदस्तूर ज़ारी है।

लेकिन फिर भी आज हम जिस विषय पर चर्चा करने वाले हैंं वह इन सबसे हटकर है और बहुत ही दिलचस्प भी । ऐसे क़िस्से बहुत कम लोगों ने ही सुने होंगे या बहुत से लोगों ने सुने ही नहीं होंगे क्योंकि ऐसी बातें उस वक्त मीडिया में आने के बावजूद चर्चा का विषय नहीं बन सकी ।लेकिन आज के दौर में इंटरनेट की वजह से बहुत सी दबी, भूली-बिसरी बातें निकल कर हम लोग के सामने आ रही हैं जो प्रेरणादायक भी हैं और जानकारी योग्य भी है।

आज हम चर्चा करेंगे मशहूर दमदार लेजेंडरी ऐक्टर प्राण साहब के खेल व देश प्रेम पर । साथ ही जानेंगे उनके और  जाने माने क्रिकेटर  कपिल देव जी के संबंध के बारे में ।और यह भी चर्चा करेंगे कि किस तरह प्राण साहब की वज़ह से भारत और पाकिस्तान का क्रिकेट मैच ड्रा हो गया ।

सबसे पहले बात करते हैं प्राण साहब के खेल और उनके देश प्रेम के बारे में।

दोस्तों प्राण साहब की दिलचस्पी क्रिकेट में तो थी ही पर क्रिकेट के आलावाा वो फुटबॉल  में भी बराबर का शौक रखते थे , शौक भी कोई छोटा-मोटा नहीं बल्कि इसे जुनून ही कहा जाए तो ज़्यादा बेहतर होगा। उस ज़माने में नरगिस जी के भाई अख्तर हुसैन के साथ फुटबॉल देखने का उनका शौक न जाने कब जुनून में बदल गया जिसका ख़ुद उन्हें भी अंदाज़ा नहीं होगा। उन्होंने  मुंबई में ख़ुद की एक फटबाल टीम ही गठित कर दी और तकरीबन 2 साल तक उस टीम का खर्च भी उठाया ठीक वैसे ही जैसे आज लोग आइ पी एल में खेलने केे लिये किसी टीम को गठित करते हैं और उसके स्पांसर बनते हैं। फुटबॉल के साथ साथ हाॅकी का भी उन्हें उतना ही शौक था। वो अक्सर हाॅकी के मैच का आनंद उठाते मैदान में पाये जाते।

प्राण साहब का क्रिकेट प्रेम तो जगजाहिर है ही ।पर बहुत कम लोगों को पता होगा कि वो मुंबई में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया समिति के खास मेंबर भी थे और बराबर सक्रिय भी रहते थे। भारत में कहीं भी क्रिकेट मैच हो वो कोशिश करते थे कि हर मैच को सामने से जाकर लाइव देखें, मुंबई हो, कलकत्ता हो या दिल्ली हो जब जहां मौका मिला उन्होंने किसी मैच को छोड़ा नहीं। मुंबई में भी उनके दोस्तों का एक ग्रुप था जो हर सुबह ग्राउंड पे पहुंचता और अपनी टीम को अभ्यास करते हुए भी देखता और सपोर्ट भी करता।

अब आप जानना चाहते होंगे कि प्राण और कपिल देव का आपस में क्या संबंध है? दरअसल इसके तार भी प्राण साहब के खेल और देश प्रेम से ही जुड़े हुए हैं।

25 जून, सन् 1983 को वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच जीतकर भारत को वर्ल्ड कप दिलाने वाली टीम इंडिया के कप्तान कपिल देव  के क्रिकेट के प्रति लगन और उनकी प्रतिभा से तो सारी दुनिया वाक़िफ है ही ।लेकिन कम लोग ही जानते होंगे कि उनके टैलेंट को बढ़ाने और उनकी बॉलिंग को सँवारने में प्राण साहब की बहुत बड़ी भूमिका है। हुआ यूँ कि भारतीय टीम मेंं सलेक्ट होने के बाद अपने शुरुआती दिनों में कपिल देव बॉलिंग में और निखार लाने के लिये ट्रेनिंग के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना चाहते थे लेकिन उस वक्त भारतीय क्रिकेट बोर्ड आज की तरह अमीर नहीं था इसलिए उसने कपिल देव का ऑस्ट्रेलिया जाने का खर्च उठाने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर कर दी और जब यह बात लोगों को पता चली तो एक मशहूर पत्रिका के संपादक ख़ालिद अंसारी  ने घोषणा की कि वह कपिल देव का ऑस्ट्रेलिया आने-जाने का खर्च तो उठा लेंगे लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उनके रहने खाने का खर्च कोई और उठा ले तो बात बन सकती है । यह बात जब प्राण साहब के कानों तक पहुँची तो उन्हें इस बात की बहुत तकलीफ हुई कि बोर्ड कपिल देव जैसे होनहार खिलाड़ी की ट्रेनिंग के लिए खर्च नहीं कर पा रहा है। उन्होंने उसी समय बोर्ड को गुस्से में एक पत्र लिखा और काफी खरी-खोटी सुनाई उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि अगर बोर्ड कपिल देव का खर्च नहीं उठा सकता तो कोई बात नहीं, कपिल देव का ऑस्ट्रेलिया आने-जाने-रहने-खाने का पूरा खर्च वो ख़ुद उठा लेंगे बोर्ड को कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है। प्राण साहब के पत्र को पढ़कर भारतीय क्रिकेट बोर्ड को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई उन्हें यह भी एहसास हुआ कि अगर यह बात दुनिया को पता चली तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए बड़े शर्म की बात होगी और भारत के साथ साथ दुनियाँ में भी एक बुरा संदेश जायेगा। उसके बाद उन लोगों ने कपिल देव के आने-जाने रहने खाने का सारा खर्च खुद उठाया और प्राण साहब को धन्यवाद करते हुये कहा कि आप निश्चिंत रहें आइंदा अब ऐसा नहीं होगा। दोस्तों इसे प्राण साहब का देश प्रेम नहीं तो और क्या कहेंगे।

प्राण साहब के खेल और देश प्रेम से जुड़ा एक बहुत ही दिलचस्प और जोश से भर देने वाला एक क़िस्सा और भी है। हुआ ये कि सन 1979 में दिल्ली में आयोजित भारत-पाकिस्तान क्रिकेट टेस्ट मैच के अंतिम दिन मैच शुरू होने से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों ने घोषणा कर दी कि अगर हमारी टीम जीत जाती है तो हम अपने टीम के हर प्लेयर को गोल्ड मेडल देंगे। मैच शुरू होने के बाद जब यह बात प्राण साहब के कानों तक गई तो उन्होंने भी अपनी तरफ से घोषणा कर दी कि अगर यह मैच भारतीय टीम ड्रा भी कर लेती है तब भी वह अपनी पूरी टीम को अपनी तरफ से गोल्ड मेडल देंगे ।क्योंकि उस वक़्त मैच की स्थिति देखकर ऐसा लग रहा था कि भारत की जीत नामुमकिन है। यह उनकी बात का जादू ही था की टीम का जोश दोगुना हो गया और दिलीप वेंगसरकर के दमदार शतक की मदद से हाथ से निकले हुए मैच को भारतीय टीम ने ड्रा करवा लिया साथ ही पाकिस्तान की जीत के मंसूबों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। प्राण साहब ने भी अपने वादे के अनुसार पूरी टीम को गोल्ड मेडल दिया और साथ ही पाकिस्तान के उन प्लेयर्स को भी अपनी तरफ से गोल्ड मेडल दिया जिन्होंने उस मैच में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। प्राण साहब का यह अंदाज़ उनके खेल-प्रेम देश-प्रेम और इंसानियत की मिसाल बना।

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