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दोस्तों भारतीय सिनेमा के हर दौर में हमने सैंकड़ों चेहरों को बड़े पर्दे की इस दुनिया में हंसते हंसाते और खिलखिलाते हुए देखा है, कुछ चेहरे जहां सिनेमा प्रेमियों के घरों की दीवारों से लेकर उनके दिलों तक जगह बनाने में कामयाब हो गए तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिनका सिर्फ चेहरा लोगों की यादों तक पहुंच पाया लेकिन उनका काम आज बहुत कम लोगों को याद है।

ऐसे ही एक मासूम और खुशमिजाज चेहरे ने 90s के दौर में सिनेमाई दुनिया का दरवाजा खटखटाया था जिसे उसकी शुरुआती फिल्मों में बड़े प्यार और मोहब्बत की नजरों से देखा गया था लेकिन फिर किस्मत के सितारे गर्दिश में खो गए और वो चेहरा गुमनामी की एक लम्बी फेहरिस्त में शामिल हो गया।

जी हां हम बात कर रहे हैं चंद्रचूड़ सिंह के बारे में।

चन्द्रचूड़ सिंह का जन्म 11 अक्टूबर 1968 को नई दिल्ली में हुआ था।

इनके पिता बलदेव सिंह उत्तरप्रदेश में अलीगढ़ की खैरा सीट से सांसद रह चुके थे और इनकी मां ओडिशा के बालनगीर के महाराजा की बेटी थी।

इनके दो भाई भी है जिनके नाम अभिमन्यु सिंह और आदित्य सिंह है, जिनमें से एक आदित्य सिंह  प्रोड्यूसर के तौर पर सिनेमाई दुनिया से जुड़े हुए हैं।

चन्द्रचूड़ सिंह की शुरुआती पढ़ाई उत्तराखंड की दून स्कूल से हुई जिसके बाद इन्होंने दिल्ली की सेंट स्टीफेंस कोलेज से ग्रेजुएट तक की शिक्षा प्राप्त की थी।

सिनेमा के प्रति अपने लगाव को देखते हुए चंद्रचूड़ सिंह साल 1988 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मुम्बई आ गए जहां उनके हिस्से का संघर्ष और सफलता उनका इंतजार कर रही थी।

मुम्बई आने के बाद हर किसीको अपना सफर शुरू से शुरू करना पड़ता है और चंद्रचूड़ सिंह की शुरुआत असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर महेश भट्ट की फिल्म आवारगी से हुई जिसमें गोंविदा और अनिल कपूर काम कर रहे थे।

 साल 1990 में चंद्रचूड़ सिंह को लीड हीरो के तौर पर अपनी पहली फिल्म में काम करने का मौका मिला जिसका नाम था जब प्यार किया तो डरना क्या जिसमें सुचित्रा कृष्णमूर्ति को इनकी हीरोइन के तौर पर लिया गया था।

Chandrachur Singh

मगर पैसों की तंगी के चलते यह फिल्म बीच में ही रुक गई और फिर कभी शुरू ही नहीं हो पाई।

इसी बीच चंद्रचूड़ सिंह को दो बड़ी फिल्मों के ओफर मिले जिसमे से एक का नाम था सौदागर जिसमें दिलीप कुमार जैसे दिग्गज कलाकार काम कर रहे थे तो वहीं दूसरी फिल्म का नाम था बेखुदी जिससे काजोल अपना डेब्यू करने जा रही थी।लेकिन इसे किस्मत का खेल कहें या कुछ और चंद्रचूड़ सिंह को इन दोनों ही फिल्मों में काम करने का मौका नहीं मिला और उन्हें कमल सदाना और विवेक मुशरान से रिप्लेस कर दिया गया।इन सभी घटनाओं से परेशान होकर चंद्रचूड़ सिंह ने  मुम्बई को छोड़ दिया और देहरादून आ गए जहां म्यूजिक की तालिम हासिल कर दून स्कूल में बच्चों को म्यूजिक सिखाने का काम शुरू कर दिया।

इसी दौरान अमिताभ बच्चन ने ABCL नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू कर दिया था जिसके तले वो अपनी पहली फिल्म तेरे मेरे सपने बना रहे थे।

चन्द्रचूड़ सिंह जब म्यूजिक टीचर के तौर पर काम कर रहे थे उसी दौरान एक दिन जया बच्चन ने उन्हें फोन किया और उनकी फिल्म में काम करने के लिए कहा, बचपन से फिल्मों का शौक रखने वाले चंद्रचूड़ सिंह अमिताभ बच्चन की फिल्म को ना कह दे इसका तो कोई सवाल ही नहीं उठता और इसीलिए चंद्रचूड़ सिंह ने एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाने का इरादा किया और मुम्बई आ गए।

चन्द्रचूड़ सिंह और अरसद वारसी जैसे नये चेहरों को लेकर बनी इस फिल्म में कुमार सानू और कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में अरसद वारसी पर फिल्माया गया गाना आंख मारे बहुत मकबूल हुआ जिसका रिमिक्स वर्जन हाल ही में फिल्म सिंबा में देखने को मिला था।

इस फिल्म में काम करने के दौरान चंद्रचूड़ सिंह को उनके करियर की बेहतरीन फिल्म माचिस भी मिली जिसे गीतकार गुलजार साहब डायरेक्ट करने वाले थे।

कुछ अड़चनों के चलते चंद्रचूड़ सिंह की फिल्म माचिस पहले रिलीज हुई जिसमें उनके काम को देखते हुए उन्हें बेस्ट डेब्यूटेंट का फिल्मफेयर अवार्ड भी दिया गया जिसके बाद चंद्रचूड़ सिंह को एक अच्छे अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा था।

इसके बाद चंद्रचूड़ सिंह श्याम घनश्याम और बेताबी जैसी फिल्मों में नजर आए लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बोक्स ओफीस पर सफलता हासिल नहीं कर पाई जिसके चलते चंद्रचूड़ सिंह को आगे सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्मों के ओफर आने लगे जिनमें उनकी प्रतिभा अन्य कलाकारों के स्टारडम के तले दबकर ही रह गई।

साल 1999 में चंद्रचूड़ सिंह ने फिल्म दाग दी फायर में काम किया जिसमें उनके साथ संजय दत्त भी थे।

इसके बाद साल 2000 में चंद्रचूड़ सिंह को उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म जोश मिली जिसमें इनके साथ शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय ने काम किया था।

Chandrachur Singh (Josh Movie)

इसी फिल्म में चंद्रचूड़ सिंह के काम और इनकी मासूमियत ने सबको इनका दीवाना बना दिया था।

यहां आपको बता दें कि जोश फिल्म का डायरेक्शन मंसूर खान ने किया था जो आमिर खान के चचेरे भाई थे और वो इस फिल्म में शाहरुख खान को और आमिर खान को साथ लाना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और आमिर खान वाला रोल चंद्रचूड़ सिंह को मिल गया था।

इसी साल चंद्रचूड़ सिंह एक और फिल्म क्या कहना मे भी नजर आए जिसमें इनके काम की तारीफ तो हुई लेकिन ये तारीफ उन्हें आगे अच्छा काम नहीं दिलवा पाई और यहीं से इनके करियर का सबसे बुरा दौर शुरू हुआ था।

साल 2001 में आई फिल्म आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया से चंद्रचूड़ सिंह ने कोमेडी में भी हाथ आजमाया लेकिन यह फिल्म भी बोक्स ओफीस पर सफल नहीं हुई।

इसके बाद चंद्रचूड़ सिंह रोयल रसोई  नाम के टीवी शो में होस्ट के तौर पर भी नजर आने के साथ साथ कुछ फिल्मों में भी नजर आए जिसमें sarhad  paar भी शामिल है।

इसी दौरान चंद्रचूड़ एक बार गोवा गए हुए थे जहां वाटर स्कीइंग करते हुए एक दुर्घटना के चलते उनका हाथ डिस्लोकेट हो गया, फिजियोथेरेपी के बाद चंद्रचूड़ सिंह अपने काम पर फिर से लौटे लेकिन दवाईयों के चलते और वर्कआउट उनका वजन बढ़ने लगा था जिसके चलते इन्हें कुछ समय तक फिल्मों से दुर होना पड़ा था।

साल 2009 में चंद्रचूड़ सिंह ने फिल्म मारुति मेरा दोस्त में एक गाना भी गाया था।

आगे चंद्रचूड़ सिंह आ गया हीरो, और चल गुरु हो जा शुरू जैसी फिल्मों के साथ साथ सावधान इंडिया के एक एपिसोड में भी नजर आए लेकिन सिनेमाई दुनिया के लिए एक चंद्रचूड़ सिंह का नाम एक भूली बिसरी दास्तां बन गया था।

साल 2020 में चंद्रचूड़ सिंह ने डिज्नी प्लस होटस्टार की क्राइम ड्रामा बेस्ड कहानी पर आधारित आर्या से वेब सीरीज की दुनिया में भी कदम रखा जिसमें इनके साथ सुष्मिता सेन भी नजर आई थीं।

इस वेब सीरीज की सफलता ने एक बार फिर चंद्रचूड़ सिंह की वापसी के लिए एक उम्मीद का काम किया है जहां वेब सीरीज के माध्यम से ही सही लेकिन इनके चाहने वाले चंद्रचूड़ सिंह को अच्छी भूमिकाओं में देख सकते हैं।

अब बात करें इनकी निजी जिंदगी के बारे में तो साल 1999 में चंद्रचूड़ सिंह की शादी अवन्तिका से हुई थी जिनसे उन्हें एक बेटा भी है।

Chandrachur Singh

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