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मन्दाकिनी: जब एक वायरल तस्वीर ने ख़त्म किया करियर

दोस्तों कहा जाता है कि तस्वीरें इंसान की जिंदगी को और उससे जुड़ी यादों को फैलाव देने का काम करती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई जिंदगी तस्वीरों में ही सिमट कर रह जाए तो उस जिंदगी का रंग रुप कैसा होगा? वो जिंदगी कैसी होगी जिसकी कहानी हम चंद तस्वीरों को सामने रखकर बता सकते हैं। तो दोस्तो आज के इस एपिसोड में हम एक ऐसी ही खुबसूरत अदाकारा की बात करने वाले है जिन्हें अपनी जिंदगी में शोहरत उस दर्जे की नसीब हुई जिसे किसी पैमाने पर तौल पाना मुश्किल है लेकिन आज वही हीरोइन महज कुछ तस्वीरों में सिमटकर रह गई है।

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है अनुराग सुर्यवंशी और आप देख रहे हैं नारद टीवी। 30 जुलाई 1963 को उत्तरप्रदेश के मेरठ शहर में जन्मी मन्दाकिनी का असली नाम यास्मिन जोसेफ है। मन्दाकिनी के पिता जोसेफ एक ब्रिटिशर थे और मां का तालुक मुस्लिम धर्म से था। मन्दाकिनी की नीली आंखें और चेहरे की मासूमियत के चलते इन्हें बहुत छोटी उम्र में ही फिल्मों में काम करने का मौका मिल गया था। लेकिन यह काम इतना आसान भी नहीं था, फिल्म मजलूम से पहले मंदाकिनी को तीन फिल्म निर्माताओं द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया था जिसका सबसे बड़ा कारण था इनका नाम जो उस समय की हिंदी फिल्मों के लिए सटीक नहीं था।

इसलिए जब इन्होंने फिल्म मजलूम में काम करने की इच्छा जताई तो फिल्म के प्रोड्यूसर रणजीत विरके ने इनका नाम बदलकर पहले माधुरी और फिर मन्दाकिनी रख दिया था। मन्दाकिनी जब अपनी पहली फिल्म मजलूम में काम कर रही थी उस दौरान महान फिल्ममेकर राज कपूर की नजर इन पर पड़ी जो फिल्म राम तेरी गंगा मैली से अपने सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर को लोंच करने की तैयारी कर रहे थे। फिल्म राम तेरी गंगा मैली के लिए सबसे पहली पसंद डिम्पल कपाड़िया थी जो अपनी पहली फिल्म बोबी से फिल्म इंडस्ट्री का जाना पहचाना चेहरा बन चुकी थी।

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लेकिन डिम्पल कपाड़िया एक पहाड़ी लड़की के किरदार में फिट नहीं बैठ रही थी और इसीलिए राज कपूर ने जब मंदाकिनी को देखा तो वो भोला भाला चेहरा उन्हें अपनी फिल्म के लिए सही लगा और इस तरह मंदाकिनी को अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म मिल गई। राम तेरी गंगा मैली फिल्म रीलीज हुई और मंदाकिनी रातों रात एक सुपरस्टार बन गई, फिर बात चाहे इनकी मासूमियत की हो या फिर इस फिल्म में दिए गए इनके कुछ बोल्ड सीन्स की मंदाकिनी की हर चीज दर्शकों के लिए इस फिल्म का केंद्र बन गई थी। हालांकि इस फिल्म के कई दृश्यों के लिए राजकपूर और मंदाकिनी को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था जिसमें झरने वाला दृश्य भी शामिल है, लेकिन कारण चाहे कुछ भी हो मगर मंदाकिनी इस फिल्म से बॉलीवुड का एक बड़ा नाम बन चुकी थी।

राजीव कपूर को लोंच करने के लिए बनाई गई इस फिल्म से मंदाकिनी को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर नोमीनेशन भी प्राप्त हुआ था। इसके बाद मंदाकिनी को कई बड़े अभिनेताओं के साथ मुख्य भूमिकाओं में फिल्मी पर्दे पर देखा गया जिसमें साल 1987 में आई फिल्म डांस डांस में मिथुन चक्रवर्ती, 1989 में कहां है कानून में आदित्य पंचोली और प्यार करके देखो में गोविंदा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। मन्दाकिनी को 1987 में रिलीज हुई फिल्म लोहा और 1986 की फिल्म आग और शोला में भी देखा गया था जिनमें कई बड़े अभिनेताओं ने काम किया था, लेकिन कोई भी फिल्म वो सफलता हासिल नहीं कर पाई जो मंदाकिनी की पहली फिल्म ने हासिल की थी।

Mandakini

धीरे धीरे फिल्म निर्माताओं के जेहन से भी मंदाकिनी की वो छवि दुर होने लगी जो उन्होंने फिल्म राम तेरी गंगा मैली में देखी थी और इसीलिए इन्हें तेजाब जैसी फिल्मों में छोटे छोटे किरदार मिलने लगे थे। मन्दाकिनी ने कुछ तेलगु फिल्मों में भी काम किया था जिसमें सिमहासनम और भार्गव रामुदु शामिल है, इसके अलावा मंदाकिनी साल1990 में मिथुन की बंगाली फिल्म अंधा बिचार में एक स्पेशल अपीयरेंस में भी नजर आई थीं। कमांडो और तकदीर का तमाशा जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली मंदाकिनी के करियर को साल 1994 में सामने आई कुछ तस्वीरों ने खत्म कर दिया था। इन तस्वीरों में भारत का सबसे बड़ा भगौड़ा दाउद इब्राहिम दिखाई दे रहा था और उसके साथ मंदाकिनी बैठी हुई थी।

इसके बाद लोगों का नजरिया मंदाकिनी के लिए बिल्कुल बदल गया, उनके बारे में कई तरह की बातें होने लगी जिनमे से कुछ लोगों द्वारा कहा गया कि मंदाकिनी दाउद इब्राहिम की गर्लफ्रेंड है तो कुछ ने कहा कि मंदाकिनी ने दुबई जाकर दाउद से शादी कर ली है। फिल्मी गलियारों में ये खबरें भी उड़ने लगी कि दाउद के कहने पर ही बहुत सी फिल्मों में मंदाकिनी को हीरोइन के तौर पर लिया गया था जिसमें फिल्म राम तेरी गंगा मैली भी शामिल है, इस फिल्म के बारे में कहा गया कि इस फिल्म में डिम्पल कपाड़िया को छोड़कर मंदाकिनी को दाउद के कहने पर कास्ट किया गया था। कुछ तस्वीरों और खबरों ने मंदाकिनी के करियर की रफ्तार को एकदम खत्म कर दिया था जिसके चलते साल 1996 में आई फिल्म जोरदार के बाद यह अदाकारा फिल्मी दुनिया से गायब हो गई थी।

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मंदाकिनी ने कुछ समय बाद वापसी करने की भी कोशिश की जिसके लिए इन्होंने म्यूजिक एल्बम का सहारा लिया और नो वेकेन्सी और सम्बाला जैसे दो एल्बम निकाले लेकिन कोई भी रास्ता इन्हें बोलीवुड फिल्मों में नहीं ला पाया। बात करें इनकी निजी जिंदगी के बारे में तो मंदाकिनी की शादी 1990 में पुर्व बौद्धिस्ट मोंक डोक्टर कग्यूर रिन्पोचे ठाकुर से हुई थी, जिनसे आज मंदाकिनी दो बच्चों की मां है जिसमें बेटे का नाम राबिल और बेटी का नाम राब्जे इनाया है। मंदाकिनी के पति डोक्टर कग्यूर को 70’s और 80’s  की जनरेशन मर्फी रेडियोज के विज्ञापन की तस्वीरों में नजर आने वाले बच्चे के तौर पर जानती है जो उस दौर में बहुत मशहूर विज्ञापन था। 2005 में एक इंटरव्यू के दौरान मंदाकिनी ने अपने करियर और कोन्ट्रोवर्सीज पर बात करते हुए कहा था कि जिन खबरों के चलते उनका करियर बर्बाद हुआ था उनमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं थी।

दाउद से उनकी मुलाकात दुबई में स्टेज शोज के दौरान एक फिल्म अभिनेत्री और एक फैन की तरह हुई थी, हम दोनों में रिश्ते और सम्बन्धों जैसा कुछ भी नहीं था। मंदाकिनी फिलहाल दलाई लामा की एक अनुयायी के तौर पर अपने पति के साथ मुम्बई में तिब्बती योगा क्लासेज और तिब्बती मेडिसिन सेंटर सम्भालती है। अपनी पहली फिल्म से ही अपनी मासूमियत से सबको अपना दीवाना बना लेने वाली मंदाकिनी की पुरी जिंदगी को अगर कुछ तस्वीरों में समेटने की कोशिश करें तो राम तेरी गंगा मैली में सफेद साड़ी में लिपटी मंदाकिनी जहां सभी के दिल में अपनी जगह बना चुकी थी तो वहीं एक क्रिकेट मैच के दौरान दाउद के साथ उनकी तस्वीर ने इस अदाकारा को हर भारतीय की नजरों में गिरा भी दिया था और बात करें आज के समय की तो 22 साल की वो खुबसूरत हीरोइन आज 58 साल की हो गई है जहां उन्हें पहचान पाना भी कभी कभी मुश्किल जान पड़ता है।

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