BiographyCricketSports

प्रवीण कुमार: वो गेंदबाज़ जिसे सरफिरा कहा जाता था

आधुनिक क्रिकेट युग में जब भी घातक पेस लाइनअप की बात होती है। तो, अक्सर वेस्टइंडीज़, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिआई पेस बैटरी का ज़िक्र किया जाता है। हालाँकि, वर्तमान भारतीय गेंदबाज़ी क्रम क्रिकेट इतिहास के सर्वश्रेष्ठ तेज़ गेंदबाज़ों की टोली में शामिल है।क्यूँकि, कपिल देव के बाद से भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी से वो पैनापन नदारद था। जिसके दम पर विश्व क्रिकेट में राज किया जा-सके। लेकिन, 21वी सदी की शुरुआत से ही ज़हीर खान, इरफ़ान पठान, श्रीसंथ जैसे जोशीले गेंदबाज़ों ने भारतीय तेज़ गेंदबाज़ी को आक्रामक नज़रिया दिया। दोस्तों, आज हम बात करने जा-रहे हैं। एक ऐसे ही आक्रामक भारतीय तेज़ गेंदबाज़ की,जिसने विरोधी टीम को उन्हीं की धरती पर धराशाई किया। वो खिलाड़ी जो अपनी गेंदों से ज़्यादा,अपने ग़ुस्से और अक्खड़पन के लिये जाना गया। वो गेंदबाज़ जिसे गले में पड़ी 250 ग्राम की सोने की चैन के लिये याद किया जाता है। जी दोस्तों! ‘अनसंग हीरोज़ ऑफ़ इंडियन क्रिकेट’ में आज हम बात कर रहे हैं ‘स्विंग के जादूगर’ प्रवीण कुमार की।

      प्रवीण कुमार का जन्म 2-अक्टूबर-1986 को उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले में हुआ था। प्रवीण के पिता सकल सिंह खैवाल पुलिस में कांस्टेबल के पद पर थे और साथ ही गाँव लपराना में खेती भी करते थे। पिता प्रवीण को पहलवान बनाना चाहते थे। लेकिन, प्रवीण अखाड़े से स्कूल का हवाला देकर मैदान में पहुँच जाते थे। माता मूर्ति सिंह खैवाल प्रवीण के क्रिकेट खेलने के शौक में उनका साथ देती थी। प्रवीण की उम्र बढ़ने के साथ क्रिकेट के लिए उनकी चाहत जूनून बनने लगी थी। एक बार स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने के लिये प्रवीण ने दसवीं क्लास की परीक्षा छोड़ दी।जब प्रवीण शाम को घर लौटे तो उनके भाई ने पूछा-“पेपर कहाँ है?” प्रवीण आगे कुछ बोल पाते कि तभी आवाज़ आयी “वैसे आज छक्का बहुत शानदार मारा था तुमने”। भाई ने प्रवीण की ये हरकत उनकी माता को बताई। लेकिन, ये बात पिता तक नहीं पहुँचने दी। जैसे-तैसे प्रवीण के घर वाले उन्हें क्रिकेट में आगे बढ़ाने के लिये तैयार हुए। मगर, प्रवीण के सामने अब पैसे की समस्या थी। अंडर-19 ट्रायल के दौरान उन्हें जूतों की ज़रुरत थी। प्रवीण ने वो दिन याद करते हुए बताया- “उस वक़्त प्यूमा के क्रिकेट शूज़ की क़ीमत 3,000 रुपए थी। 1,000 रुपए तो माँ ने दे दिये थे। बाक़ी पैसों के लिये मैंने अपनी साइकिल एक मिठाई की दूकान पे बेच दी और जूते ख़रीद लिये।”

ये भी पढ़ें-अमिताभ बच्चन की फिल्म अजूबा के बनने की कहानी

ग़रीबी की तपन और कुछ कर गुज़रने के जज़्बे ने प्रवीण को अटूट हौसले से भर दिया। जिसका परिणाम रहा साल 2004-05 विजय हज़ारे ट्रॉफी में उनका शानदार प्रदर्शन। प्रवीण ने उस साल बंगाल के रणदेब बोस के साथ संयुक्त रूप से सर्वाधिक विकेट प्राप्त किये। उसी साल अपने पहले रणजी सत्र में प्रवीण ने 41 विकेट प्राप्त किये और 386 रन भी बनाये। अपनी इस फ़ॉर्म को बरक़रार रखते हुए प्रवीण ने अगले रणजी सत्र में रिकॉर्ड 49 विकेट हासिल किये। अब प्रवीण कुमार का नाम घरेलू क्रिकेट में चमक रहा था। फिर आयी साल 2007 की एन.के.पी.साल्वे चैलेंजर ट्रॉफी। प्रवीण ने शुरुआती दो मुक़ाबलों में 9 विकेट प्राप्त नाम लिखे और सिर्फ़ 89 रन ख़र्चे। प्रवीण का यह शानदार प्रदर्शन उन्हें भारतीय चयनकर्ताओं की नज़रों में ले आया। इस तरह 12-नवंबर-2007 को प्रवीण ने जयपुर में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वन-डे डेब्यू किया। पहले दो मैचों में प्रवीण कुछ ख़ास नहीं कर पाए। लेकिन, चयनकर्तओं ने प्रवीण पे भरोसा बनाये रखा। उसके बाद आयी साल 2008 की वो ऐतिहासिक कामनवेल्थ बैंक सीरीज़ जो धोनी की कप्तानी वाली युवा भारतीय टीम ने अपने नाम की। सीरीज़ में प्रवीण ने 4 मैच खेलकर 10 विकेट अपने नाम किये। भारतीय टीम की करिश्माई जीत में प्रवीण को एक प्रमुख कारण गिना गया। प्रवीण की बलखाती गेंदों की चर्चा अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भी हो रही थी।

      प्रवीण कुमार के पास नयी गेंद को विकेट के दोनों ओर स्विंग कराने की क़ाबिलियत थी। साथ ही स्लोवर और यॉर्कर गेंदों पर प्रवीण के नियंत्रण ने उन्हें और भी घातक बना दिया था। प्रवीण का ज़िक्र करते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज प्रभाकर ने कहा था “अगर, बात स्विंग और नियंत्रण की करें। तो, प्रवीण एक ‘जादूगर’ है।” साल 2008 से 2010 के बीच प्रवीण ने 47 एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 5.02 के आकर्षक इकॉनमी रेट से 57 विकेट प्राप्त किये। उस दौरान प्रवीण कुमार भारतीय पेस बैटरी में ज़हीर खान के साथ मुख्य गेंदबाज़ थे। प्रत्येक भारतीय को प्रवीण से 2011 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद थी। सबका कहना था कि घरेलू पिचों का फ़ायदा प्रवीण कुमार से बेहतर कोई नहीं उठा सकता। लेकिन, दुनिया बनाने वाले को कुछ और ही मंज़ूर था। वर्ल्ड कप 2011 से ठीक पहले प्रवीण कुमार को पहले डेंगू और उसके बाद कोहनी में लगी चोट ने उन्हें टीम से बाहर कर दिया। प्रवीण की जगह टीम में श्रीसंथ को शामिल किया गया और इसमें कोई दो राय नहीं है कि 2011 विश्व कप के दौरान कई मौकों पर प्रवीण की कमी खली थी। विश्व कप 2011 के बाद प्रवीण कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करते हुए पहले वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ टेस्ट डेब्यू किया। उसके बाद इंग्लैंड के विरुद्ध पहली पारी में लॉर्ड्स पर पांच विकेट लेकर ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज करा लिया। लेकिन, चोट प्रवीण के पीछे ऐसे लग गयी थी। जैसे विक्रम के पीछे बेताल लगा था। प्रवीण जब अपने रंग में लौटकर आते। कोहनी या घुटने की चोट उन्हें फिर क्रिकेट से दूर कर देती।

Praveen Kumar

अफ़्रीका के विरुद्ध अपना अंतिम अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलते हुए प्रवीण कुमार बुरी तरह फ्लॉप रहे। इधर प्रवीण की ख़राब फ़िटनेस और गिरती फ़ॉर्म थी। तो, दूसरी तरफ़ प्रवीण के रणजी टीममेट भुवनेश्वर कुमार कमाल का प्रदर्शन कर रहे थे। यही वो वजह रही जिसके चलते चयनकर्ताओं ने प्रवीण कुमार से आगे बढ़कर सोचना शुरू किया। लेकिन, देश का प्रतिनिधत्व करने का जुनून प्रवीण को क्रिकेट से जोड़े हुए था। प्रवीण वापसी की कोशिशें करते रहे। लेकिन, 2012 के बाद से भारतीय टीम में वापसी नहीं कर पाये। 

      भारतीय टीम से बाहर रहने के चलते प्रवीण कुमार अपना संयम खोते जा-रहे थे। साल 2013 में कॉरपोरेट ट्रॉफी के दौरान ओएनजीसी और आयकर विभाग के बीच खेले गए एक मैच में प्रवीण कुमार बल्लेबाज अजीत अर्गल से उलझ पड़े। मैच के 49वें ओवर में दोनों के बीच कहा-सुनी हो गई। प्रवीण ने बीच-बचाव करने वाले अंपायर को भी भला-बुरा कह डाला। ओवर के दौरान प्रवीण कुमार ने अजितेष को दो बाउंसर फेंकी और एक शॉर्ट बॉल डाली। इसके बाद अजितेष ने अंपायर कमलेश शर्मा से शिकायत की और पूछा-‘आखिर वे नो बॉल क्यों नहीं दे रहे हैं ?’  इतना कहना था कि प्रवीण कुमार गुस्से से लाल हो उठे और सीधे बल्लेबाज़ पर भड़ास निकाली। मैच के  बाद जाँच में धमकाने और अपमानित करने का दोषी पाए जाने के बाद रेफरी ने कुमार को ‘मानसिक तौर पर अनफिट’ और ‘सिरफिरा क्रिकेटर’  बताया। बीसीसीआई ने प्रवीण को एक साल के लिये विजय हज़ारे ट्रॉफी खेलने से प्रतिबंधित कर दिया था। हालाँकि, प्रवीण कुमार के साथ उनके ग़ुस्से को लेकर विवाद पहली बार नहीं जुड़ा था। साल 2008 में डॉक्टर को पीटने और साल 2011 में इंग्लैंड एवं वेस्टइडीज़ में दर्शकों से झड़प की घटनाये हो चुकी थी। लेकिन, कॉर्पोरेट ट्रॉफी में हुए विवाद ने उन्हें सामाजिक और मानसिक तौर पर बुरी तरह आहत किया। अपने तनाव पूर्ण समय को याद करते हुए प्रवीण ने कहा -‘‘एक समय ऐसा आया था। जब मैंने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। मैं सोचता था कि लोग मुझसे कैसे-कैसे सवाल पूछेंगे?लेकिन, धीरे-धीरे मैंने बाहर निकलना शुरू किया और सारी नकारात्मकता समाप्त हो गई।“ उन्होंने आगे कहा- ‘‘मैं निराश था। मुझे ऐसे मंच पर खेलने का मौका नहीं मिला जिसका मैं काफी समय से हिस्सा था।“

Watch on You Tube:-

दोस्तों, आपको ये जानकर आश्चर्य होगा। कि,प्रवीण कुमार जैसे मानसिक तौर पे मज़बूत क्रिकेटर ने भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी। प्रवीण ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया- “कुछ महीनो पहले मैं रिवॉल्वर लेकर हरिद्वार के रास्ते कार इस मक़सद से दौड़ा रहा था। कि आज खेल ही ख़त्म कर देते हैं। लेकिन, कार में लगी बच्चों की तस्वीर ने मेरा इरादा बदल दिया और मैं सही सलामत घर लौट आया।” डिप्रेशन से जूझ रहे प्रवीण कुमार ने ख़ुद को साबित करने  की चाहत के दम पर ज़िन्दगी से एक बार फिर नाता जोड़ लिया। साल 2018 में प्रवीण ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी। प्रवीण ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर में 6 टेस्ट, 68 एकदिवसीय और 10 टी-20 मैचों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। जिसमे प्रवीण ने क्रमशः 27 , 77 और 8 विकेट प्राप्त किये। साथ ही प्रवीण कुमार साल 2008 से 2017 के बीच आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर , किंग्स इलेवन पंजाब, गुजरात लायंस, मुंबई इंडियंस और सनराइज़र्स हैदराबाद की तरफ़ से कुल 119 मैच खेले। इन 119 मैचों में प्रवीण ने 28.04 के स्ट्राइक रेट से 90 विकेट लिये, इस दौरान उन्होंने दो बार ‘मैन ऑफ़ द मैच’ अवार्ड भी जीता।

क्रिकेट से संन्यास के बाद प्रवीण अपना ज़्यादातर वक़्त परिवार के साथ ही गुज़ारते हैं। प्रवीण डिप्रेशन पर जीत के लिये अपनी पत्नी सपना चौधरी को श्रेय देते हैं। प्रवीण ने साल 2010 में सपना से शादी की थी। जोकि, खुद एक राष्ट्रिय स्तर की शूटिंग खिलाड़ी हैं। फ़िलहाल तो प्रवीण कुमार गाँव बरनावा में एक फार्महाउस और मेरठ में रेस्ट्रॉन्ट के व्यवसाय पर ध्यान दे रहे हैं। लेकिन, प्रवीण की चाहत है कि वो बोलिंग कोच के रूप में अपनी प्रतिभा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकें।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button